इंदौर कलेक्टर जनसुनवाई में मंगलवार को एक ऐसा मामला सामने आया जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। उत्तर प्रदेश के बिजनौर से गंभीर रूप से बीमार एक वृद्धा को परिजन आईसीयू एम्बुलेंस से करीब 1000 किलोमीटर का सफर तय कर इंदौर लेकर पहुंचे।
परिवार ने आरोप लगाया कि उनकी करीब 2 करोड़ रुपए मूल्य की जमीन पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कब्जा कर लिया गया है और वर्षों से शिकायतों के बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिल पाया है।
1969 में आवंटित हुए थे प्लॉट
वृद्धा के बेटे फरहान ने बताया कि गांधीनगर क्षेत्र में उनकी मां के नाम दो प्लॉट हैं, जो वर्ष 1969 में तत्कालीन वेस्ट निवारा क्रेडिट सोसायटी द्वारा आवंटित किए गए थे। बाद में इन संपत्तियों का नामांतरण भी विधिवत उनकी मां के नाम पर हो चुका था और वे वर्षों से इन जमीनों की वैध मालिक हैं।
परिजनों और उनके अधिवक्ता अशफाक खान के अनुसार, जब परिवार बिजनौर चला गया था, तब संपत्ति की देखरेख की जिम्मेदारी रिश्तेदारों को सौंपी गई थी। आरोप है कि इसी भरोसे का फायदा उठाकर कुछ लोगों ने सोसायटी प्रबंधन से मिलीभगत की और फर्जी आवंटन पत्र तथा दस्तावेज तैयार कर संपत्ति अपने नाम दर्ज करा ली। परिवार का कहना है कि वर्तमान में विवादित जमीन की कीमत करीब दो करोड़ रुपए है।
प्रशासन से लगाई गुहार
पीड़ित परिवार का आरोप है कि उन्होंने इस मामले की शिकायत कई बार पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लगातार प्रयासों के बावजूद राहत नहीं मिलने पर आखिरकार परिवार को कलेक्टर जनसुनवाई का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं से जूझ रहीं वृद्धा को परिजन विशेष आईसीयू एम्बुलेंस से इंदौर लेकर पहुंचे। जनसुनवाई में उन्होंने प्रशासन के समक्ष पूरी व्यथा सुनाई और अपनी जमीन वापस दिलाने की मांग की। वृद्धा की हालत और संघर्ष को देखकर जनसुनवाई में मौजूद लोग भी भावुक नजर आए।
कलेक्टर ने जांच का दिया आश्वासन
अधिवक्ता अशफाक खान ने बताया कि कलेक्टर ने आवेदन प्राप्त कर मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।
अब परिवार की उम्मीद प्रशासनिक जांच पर टिकी हुई है। उनका कहना है कि सभी स्तरों पर निराशा मिलने के बाद अब उन्हें कलेक्टर जनसुनवाई से न्याय मिलने की उम्मीद है।










