मध्यप्रदेश के लगभग साढ़े तीन लाख शिक्षकों को अत्यावश्यक सेवा अधिनियम के अंतर्गत शामिल कर लिया गया है, जिसके चलते आगामी दो माह तक उनके अवकाश पर प्रतिबंध रहेगा। इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा मंडल ने निर्देश जारी कर दिए हैं, जो परीक्षा अवधि में लागू रहेंगे। ये आदेश प्रदेश के सभी विद्यालयों पर प्रभावी होंगे। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में माध्यमिक शिक्षा मंडल की परीक्षाएं 7 फरवरी से शुरू होकर 13 मार्च तक आयोजित की जाएंगी।
इस परीक्षा में निजी और शासकीय स्कूलों के लगभग 18 लाख विद्यार्थी शामिल होंगे। प्रदेशभर में करीब चार हजार परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जहां पर्यवेक्षक, केंद्राध्यक्ष, उपकेंद्राध्यक्ष सहित आवश्यक स्टाफ की तैनाती की जाएगी। ड्यूटी पर तैनात कर्मियों की संख्या हड़ताल, धरना, प्रदर्शन या अवकाश के कारण प्रभावित न हो, इसके लिए शिक्षकों की सेवाओं को एस्मा के अंतर्गत रखा गया है। मंडल अधिकारियों के अनुसार आवश्यक निर्देश जारी कर सभी जिलों को भेज दिए गए हैं, जिनका पालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।
क्या होता है एस्मा ?
ईएसएमए (Essential Services Maintenance Act) एक विधिक प्रावधान है, जिसके माध्यम से सरकार आवश्यक सेवाओं को सुचारु बनाए रखने के लिए हड़ताल या किसी भी प्रकार की रुकावट पर प्रतिबंध लगाती है।
105 केन्द्रों पर होगी परीक्षा
राजधानी में परीक्षाएं 105 केंद्रों पर आयोजित की जाएंगी, जिनकी सत्यापन प्रक्रिया पूरी कर रिपोर्ट जमा की जा चुकी है। इन केंद्रों में शासकीय और निजी, दोनों प्रकार के विद्यालय शामिल हैं।
परीक्षा अवधि के दौरान शिक्षकों की सेवाएं अत्यावश्यक सेवा कानून के अंतर्गत रहेंगी। माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा इस संबंध में ईएसएमए लागू करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं, ताकि परीक्षा संचालन में किसी प्रकार का व्यवधान न हो। परीक्षाएं फरवरी से प्रारंभ होंगी।
— मुकेश मालवीय, रजिस्ट्रार, माध्यमिक शिक्षा मंडल









