मध्यप्रदेश के हर शहर में बढ़ेगी हरियाली, 5 साल में 100 करोड़ रुपए होंगे खर्च, मोहन यादव कैबिनेट ने दी मंजूरी

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By Raj RathorePublished On: July 8, 2026
Mohan Yadav Planting Tree

मध्य प्रदेश सरकार ने शहरी क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए ‘नमो हरित योजना’ शुरू करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी दी गई। अगले पांच वर्षों के लिए इस योजना पर 100 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा संचालित इस योजना के तहत प्रदेश के सभी नगरों में नगर वन विकसित किए जाएंगे। इसके लिए स्थानीय स्तर पर भूमि आरक्षित की जाएगी। अभी तक नगर वन केवल चुनिंदा बड़े शहरों में विकसित किए जा रहे थे, लेकिन अब इस योजना का विस्तार पूरे प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में किया जाएगा।

एमएसएमई मंत्री चैतन्य काश्यप ने बताया कि योजना का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाना, पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करना और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखना है।

जनभागीदारी से तैयार होंगे नगर वन

योजना के तहत नगर वन जनभागीदारी और कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड के सहयोग से विकसित किए जाएंगे। जितनी राशि जनभागीदारी और CSR के माध्यम से प्राप्त होगी, उतनी ही राशि राज्य सरकार भी उपलब्ध कराएगी। नगर वन तैयार होने के बाद उनके पांच वर्षों तक रखरखाव और उन्नयन का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी।

कैबिनेट ने प्रदेश में नया अत्याधुनिक डेटा सेंटर स्थापित करने को भी मंजूरी दी है। करीब 800 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह डेटा सेंटर आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी उन्नत सुविधाओं से लैस होगा। वर्तमान डेटा सेंटर करीब 12 वर्ष पहले स्थापित किया गया था, जिसे अब तकनीकी जरूरतों के अनुसार अपग्रेड किया जाएगा।

स्वामित्व योजना में लोगों को मिली बड़ी राहत

कैबिनेट ने स्वामित्व योजना के तहत भी बड़ा फैसला लिया है। अब ग्राम पंचायत क्षेत्रों में पट्टों के पंजीयन के दौरान लोगों को स्टांप शुल्क के साथ अतिरिक्त उपकर भी नहीं देना होगा। यह अतिरिक्त राशि राज्य सरकार स्वयं वहन करेगी।

मंत्री चैतन्य काश्यप ने बताया कि पहले कैबिनेट ने पंजीयन शुल्क माफ करने का निर्णय लिया था, लेकिन बाद में सामने आया कि पंचायत क्षेत्रों में अतिरिक्त उपकर का भुगतान लोगों को करना पड़ रहा है। अब सरकार ने इस उपकर का भार भी अपने ऊपर लेने का निर्णय लिया है, जिससे योजना के लाभार्थियों को किसी प्रकार का शुल्क नहीं देना पड़ेगा।