एमपी में 19 करोड़ की लागत से बनेगा देश का पहला रॉक आर्ट ईको पार्क म्यूजियम, 2028 तक होगा तैयार

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By Raj RathorePublished On: January 7, 2026
Rock Art Eco Park Museum

Rock Art Eco Park Museum : यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल भीमबेटका, जो अपनी पाषाणकालीन गुफाओं और शैल-चित्रों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है, अब पर्यटकों को एक नया अनुभव देने जा रहा है। यहां देश का पहला ‘रॉक आर्ट ईको पार्क म्यूजियम’ तैयार किया जा रहा है। मध्यप्रदेश पर्यटन निगम इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर काम कर रहा है, जिसकी अनुमानित लागत 19 करोड़ रुपये बताई गई है।

भीमबेटका में मौजूद 30 हजार साल पुरानी शैल-कलाओं को देखने के लिए हर साल हजारों देशी-विदेशी पर्यटक आते हैं। हालांकि, कई चित्र दुर्गम पहाड़ियों पर स्थित होने के कारण पर्यटकों की पहुंच से दूर रह जाते थे। इसी समस्या के समाधान के लिए पर्यटन विभाग ने यह अनूठी पहल की है।

डिजिटल माध्यम से देख सकेंगे 750 शैल-चित्र

अधिकारियों के अनुसार, भीमबेटका की सात पहाड़ियों में 750 से अधिक रॉक शेल्टर्स (शैलाश्रय) और चित्र फैले हुए हैं। एक सामान्य पर्यटक के लिए इन सभी जगहों तक पहुंचना लगभग असंभव होता है।

प्रस्तावित म्यूजियम 1.12 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला होगा। यहां पर्यटकों को आधुनिक तकनीक और डिजिटल माध्यमों से उन सभी दुर्लभ शैल-चित्रों का अनुभव कराया जाएगा, जो मुख्य मार्ग से दूर स्थित हैं। इसका मुख्य उद्देश्य सभी ऐतिहासिक धरोहरों को एक ही छत के नीचे सुलभ बनाना है।

प्रकृति से छेड़छाड़ नहीं, बनेंगे अस्थायी ढांचे

इस परियोजना की सबसे खास बात इसका निर्माण है। यहां कोई भी पारंपरिक पक्का भवन या बड़ा हॉल नहीं बनाया जाएगा। चूंकि भीमबेटका एक संरक्षित वन क्षेत्र और विश्व धरोहर स्थल है, इसलिए पर्यावरण और मूल परिवेश को ध्यान में रखते हुए यहां केवल अस्थायी सामग्रियों का उपयोग होगा।

यह ईको पार्क पूरी तरह से भीमबेटका के प्राकृतिक परिवेश जैसा ही दिखेगा। इसे इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि आधुनिकता और प्राचीनता का संगम हो सके। निर्माण कार्य में कंक्रीट के बजाय ईको-फ्रेंडली मटेरियल का इस्तेमाल किया जाएगा।

2028 तक पूरा करने का लक्ष्य

पर्यटन विभाग ने इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए वर्ष 2028 का लक्ष्य निर्धारित किया है। अधिकारियों का मानना है कि इस म्यूजियम के बनने से न केवल पर्यटकों की संख्या में इजाफा होगा, बल्कि शोधकर्ताओं और इतिहास प्रेमियों को भी पाषाणकालीन मानव जीवन को समझने में आसानी होगी।

गौरतलब है कि भीमबेटका को वर्ष 2003 में यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल घोषित किया था। यहां के शैल-चित्र आदिमानव के जीवन, शिकार और नृत्य जैसी गतिविधियों को दर्शाते हैं, जो इतिहास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।