Bhopal: सरकारी जमीन पर निजी फायदा? पूर्व मंत्री के बेटे पर कांग्रेस का आरोप, मंडी की जमीन पर खड़ा किया पेट्रोल पंप

कांग्रेस नेता प्रदीप अहिरवार ने पूर्व मंत्री कमल पटेल के बेटे संदीप पटेल पर मंडी की जमीन को फर्जी दस्तावेजों के जरिए पेट्रोल पंप को पट्टे पर देने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार बनने के बाद प्रदेश में भ्रष्टाचार के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने पूर्व मंत्री कमल पटेल के बेटे संदीप पटेल पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद से भ्रष्टाचार के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। इसी क्रम में एक नया मामला संदीप पटेल से जुड़ा हुआ सामने आया है।

बुधवार को पीसीसी में आयोजित प्रेसवार्ता में अहिरवार ने दावा किया कि उपलब्ध दस्तावेजों के मुताबिक, संदीप पटेल और मंडी समिति के अधिकारियों ने मिलकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए, जिसके जरिए एक पेट्रोल पंप कंपनी को मंडी की जमीन का पट्टा दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस जमीन का वास्तविक स्वामित्व पूर्व कृषि मंत्री कमल पटेल के बड़े बेटे के पास है।

जाली कागजात बनाकर किया जमीन का सौदा

प्रदीप अहिरवार ने बताया कि इस घोटाले का पर्दाफाश तब हुआ जब मामले की विस्तृत जांच की गई। दस्तावेजों की पड़ताल में हरदा मंडी घोटाले का खुलासा हुआ, जिसमें सामने आया कि संदीप पटेल ने अपने पिता कमल पटेल के प्रभाव का उपयोग करते हुए मंडी समिति से जमीन का पट्टा हासिल किया और फर्जी दस्तावेज तैयार कर उसे पेट्रोल पंप के लिए किराए पर दे दिया। मध्यप्रदेश मंडी बोर्ड के नियमों में न तो इस प्रकार के पट्टे के हस्तांतरण की अनुमति है और न ही इसका कोई कानूनी प्रावधान मौजूद है। मंडी समिति हरदा ने एक बैठक में संदीप पटेल के साथ किए गए अनुबंध की एक शर्त को रद्द कर दिया, जबकि समिति को ऐसा करने का अधिकार ही नहीं था। पूरी प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी कर राजनीतिक प्रभाव का दुरुपयोग किया गया।

नियमों की अनदेखी और राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल

Bhopal: सरकारी जमीन पर निजी फायदा? पूर्व मंत्री के बेटे पर कांग्रेस का आरोप, मंडी की जमीन पर खड़ा किया पेट्रोल पंप

अहिरवार ने आरोप लगाया कि संदीप पटेल ने जिस जमीन को सेवा कार्यों के लिए पट्टे पर लिया था, उसे बिना किसी कानूनी संशोधन के व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया। यह न केवल नियमों का सीधा उल्लंघन है, बल्कि मंडी समिति की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है। उन्होंने कहा कि संदीप पटेल ने यह कदम तब उठाया जब उनके पिता कमल पटेल मंत्री पद पर थे, जिससे स्पष्ट होता है कि सत्ता के प्रभाव का दुरुपयोग कर सरकारी नियमों और कानूनों की अनदेखी की गई।

हत्या के प्रयास का मुकदमा पहले से दर्ज

अहिरवार ने बताया कि 2008 में संदीप पटेल के खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया गया था, जिससे उसे पेट्रोल पंप स्थापित करने के लिए आवश्यक चरित्र प्रमाण पत्र और एनओसी प्राप्त करना कठिन हो गया था। नियमानुसार, पुलिस अधीक्षक और जिला कलेक्टर की स्वीकृति अनिवार्य थी, जो उसे मिलना संभव नहीं था। इसी बाधा को दूर करने के लिए उसने पेट्रोल पंप अधिकारियों के साथ मिलकर इस घोटाले को अंजाम दिया। संदीप पटेल ने एचपीसीएल के साथ साठगांठ कर जमीन को उप-पट्टे पर दे दिया और इसके बदले में लाखों रुपये का किराया प्राप्त किया।

कानूनी प्रक्रिया पर उठते सवाल

अहिरवार ने बताया कि मध्य प्रदेश कृषि उपज मंडी अधिनियम, 1972 के तहत पट्टे पर दी गई भूमि को उप-पट्टे पर देना पूरी तरह से प्रतिबंधित था। 25 मई 2009 को प्रकाशित राजपत्र में यह स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि पट्टे की जमीन को किराए पर नहीं दिया जा सकता। साथ ही, नियमों के अनुसार, यदि पट्टे पर दी गई भूमि का उपयोग दो वर्षों के भीतर नहीं किया जाता, तो मंडी समिति को उसे वापस लेने का अधिकार था। इस मामले में संदीप पटेल द्वारा भूमि को उप-पट्टे पर देना और इसके बदले किराया वसूलना न केवल कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन था, बल्कि सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग और निजी लाभ के लिए उसका गलत इस्तेमाल करने का स्पष्ट उदाहरण है।