Kolkata to London Bus : आज के दौर में लंबी दूरी की यात्रा के लिए हवाई जहाज सबसे लोकप्रिय साधन है, लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब लोग बस से विदेश यात्रा करते थे। 1957 से 1976 के बीच लंदन और कोलकाता के बीच एक अनोखी बस सेवा संचालित होती थी। यह बस करीब 16,000 किलोमीटर की दूरी तय करती थी और इसे दुनिया की सबसे लंबी बस यात्राओं में गिना जाता था।
इस बस सेवा का इतिहास काफी दिलचस्प है। यह यात्रा न केवल लंबी थी, बल्कि बेहद रोमांचक भी हुआ करती थी। बस का रूट 10 अलग-अलग देशों से होकर गुजरता था, जिसमें एशिया और यूरोप के कई प्रमुख शहर शामिल थे। भारत में यह बस कोलकाता से चलकर बनारस (अब वाराणसी), इलाहाबाद (अब प्रयागराज) और दिल्ली होते हुए पाकिस्तान की ओर बढ़ती थी।
50 दिनों में पूरा होता था सफर
इस ऐतिहासिक बस सेवा की शुरुआत 15 अप्रैल 1957 को हुई थी। पहली यात्रा में 20 यात्रियों को लेकर यह बस लंदन से रवाना हुई थी और पूरे 50 दिनों के बाद 5 जून 1957 को कोलकाता पहुंची थी। इतनी लंबी दूरी तय करना किसी चुनौती से कम नहीं था, इसलिए बस में यात्रियों के आराम का पूरा ख्याल रखा जाता था।
लंदन से चलने के बाद यह बस बेल्जियम, पश्चिम जर्मनी, ऑस्ट्रिया, यूगोस्लाविया, बुल्गारिया, तुर्की, ईरान और अफगानिस्तान होते हुए पाकिस्तान में प्रवेश करती थी। पाकिस्तान पार करने के बाद यह भारत में दाखिल होती थी और अपने अंतिम पड़ाव कोलकाता तक पहुंचती थी। इसी रूट से यह बस वापस लंदन भी जाती थी।
लग्जरी सुविधाओं से लैस थी ‘अल्बर्ट बस’
इस बस का निर्माण इंग्लैंड की मशहूर कंपनी ‘एल्बियन मोटर्स’ (Albion Motors) ने किया था, जो ट्रक और बस बनाने के लिए जानी जाती थी। इसका संचालन ‘अल्बर्ट ट्रैवल’ द्वारा किया जाता था, जिस कारण इसे ‘अल्बर्ट बस’ के नाम से जाना गया। बस में यात्रियों के सोने के लिए बंक (Bunks) की व्यवस्था थी।
इतना ही नहीं, सफर के दौरान बोरियत न हो, इसके लिए बस में रीडिंग लाउंज बनाया गया था, जहां अखबार और किताबें उपलब्ध रहती थीं। मनोरंजन के लिए रेडियो और म्यूजिक सिस्टम भी मौजूद था। बस के भीतर एक किचन और हीटर की सुविधा भी थी। इतनी सारी सुविधाओं के कारण बस में केवल 20 यात्रियों के बैठने की जगह ही बचती थी।
किराया और पासपोर्ट की जरूरत
उस समय इस शाही सफर का किराया भी कम नहीं था। 1957 में लंदन से कोलकाता की एक तरफ की यात्रा का किराया 85 ब्रिटिश पाउंड था। आज की विनिमय दरों और महंगाई को जोड़कर देखें, तो यह रकम भारतीय रुपयों में करीब 2 लाख 76 हजार रुपये से अधिक बैठती है। 1973 में यह किराया बढ़कर 145 पाउंड हो गया था।
चूंकि यह बस कई देशों से होकर गुजरती थी, इसलिए यात्रियों को वीजा और पासपोर्ट के कड़े नियमों का पालन करना होता था। अलग-अलग देशों की सीमाओं को पार करने के लिए वैलिड वीजा और पासपोर्ट अनिवार्य थे। हालांकि, मैरीटाइम इंडस्ट्री से जुड़े लोग ‘सीमैन बुक’ के जरिए भी यात्रा कर सकते थे।
भारत-पाक तनाव के चलते बंद हुई सेवा
यह बस सेवा करीब दो दशकों तक बदस्तूर जारी रही। अमीर वर्ग के बीच इस रूट पर सफर करना एक सपने जैसा होता था। हालांकि, भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते राजनीतिक तनाव और सीमा विवादों के चलते इस सेवा पर असर पड़ा। आखिरकार, 1976 में इस ऐतिहासिक बस सेवा को हमेशा के लिए बंद कर दिया गया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सेवा बंद होने के बाद बस एक दुर्घटना का शिकार हो गई थी। बाद में इसे एक ब्रिटिश यात्री एंडी स्टीवर्ट ने खरीदा और मरम्मत कर इसे डबल डेकर बस में बदल दिया। साल 2012 में इस बस को ऑस्ट्रेलिया ले जाया गया, जहां यह कई ऑटोमोबाइल प्रदर्शनी का हिस्सा बनी रही।










