मध्य प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर दिए गए बयान ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। भोपाल में आयोजित शालिग्राम तोमर स्मृति कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि अब संघ में लोगों की संख्या तो काफी बढ़ गई है, लेकिन अच्छे लोगों की कमी होती जा रही है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा सरकार बनने के बाद कई अधिकारी खुद को संघ से जुड़ा बताने लगे हैं।
विजयवर्गीय ने कहा कि अब जो भी अधिकारी मिलता है, वह कहता है कि उसने संघ की शाखा में पट्टी बांधी है या संघ की चड्डी पहनी है। कोई बताता है कि उसके पिता संघ जाते थे, तो कोई कहता है कि उसके पिता संघ के पदाधिकारी रहे हैं। उन्होंने तंज भरे अंदाज में कहा कि सरकार बनने के बाद तो सभी अधिकारी संघ के हो गए हैं।
‘भीड़ बढ़ी, लेकिन अच्छे लोगों की कमी’
मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि संघ का विस्तार और विचारधारा दोनों तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन यदि अच्छे लोग नहीं होंगे तो विचारधारा का महत्व भी कम हो जाएगा। उन्होंने कहा कि इस विषय पर संगठन के भीतर चिंतन और मनन की जरूरत है।
भोपाल में आयोजित शालिग्राम तोमर स्मृति कार्यक्रम में दिया गया उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी इसे लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
मुख्यमंत्री ने किया शालिग्राम तोमर को याद
इसी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शालिग्राम तोमर को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उन्होंने संगठन में कार्यकर्ताओं को गढ़ने का महत्वपूर्ण काम किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि शालिग्रामजी अनुशासनप्रिय थे और कार्यकर्ताओं की समस्याओं को समझते थे।
उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि “मेरी शादी भी शालिग्रामजी ने ही कराई थी।” साथ ही देवधर और मोघेजी जैसे वरिष्ठ कार्यकर्ताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें देखकर हमेशा नई ऊर्जा मिलती थी।
उमंग सिंघार का पलटवार
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कैलाश विजयवर्गीय के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि जब सरकार के मंत्री स्वयं यह स्वीकार कर रहे हैं कि अधिकारी-कर्मचारी खुद को RSS से जुड़ा बताने की होड़ में हैं, तो यह प्रशासनिक निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने आगे कहा कि मंत्री खुद मान रहे हैं कि संगठन और विचारधारा तो मजबूत हो रही है, लेकिन अच्छे लोगों की कमी है। यह बयान सरकार और संगठन दोनों के लिए आत्ममंथन का विषय है।










