राजस्थान के 31 हजार से ज्यादा संविदाकर्मियों  को दीपावली से दो दिन पहले राज्य की अशोक गहलोत सरकार ने बड़ा तोहफा दिया है। लम्बे समय से संविदा के रूप में काम करने वाले कर्मचारियों को नियमित करने का फैसला लिया गया है। पंचायत सहायक, पैराटीचर्स और शिक्षाकर्मी के रूप में कार्यरत संविदाकर्मियों को नियमित करने के आदेश जारी कर दिए गए है। इन तीनों कार्मिकों को शुरुआत में 10,400 रुपए मिलेंगे। 9 साल की नौकरी पूरी होने पर 18,500 रुपए और 18 साल की सर्विस पूरी होने पर 32,300 रुपए वेतन के रूप में मिलेंगे।

2018 के विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में संविदाकर्मियों को नियमित करने का वादा किया था। हजारों संविदाकर्मी लम्बे समय से नियमित करने की मांग कर रहे थे। इनमें से कई संविदाकर्मी तो ऐसे हैं जिनको सर्विस करते हुए 10 साल से ज्यादा का समय हो गया। इन संविदाकर्मियों का सपना अब पूरा हो गया है। दिवाली से पहले 31 हजार से ज्यादा घरों में खुशियां लौट आई है। संविदाकर्मियों ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का आभार जताया है।

कैबिनेट सब कमेटी ने की थी सिफारिश

राज्य सरकार ने संविदाकर्मियों को नियमित करने के लिए मंत्री बीडी कल्ला के नेतृत्व में कैबिनेट सब कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी ने संविदाकर्मियों को नियमित करने के नियम बनाए। हालांकि संविदाकर्मी सरकारी कर्मचारियों के अनुसार वेतन और पदोन्नति की मांग कर रहे थे लेकिन राज्य सरकार ने ऐसा नहीं करके अलग से नियम बनाए हैं। कैबिनेट सब कमेटी की ओर से बनाए गए राजस्थान कॉन्ट्रेक्चुअल सर्विस रूल्स 2021 के दायरे में आने वाले संविदाकर्मियों को ही नियमित होने का लाभ मिलेगा।

जॉब सिक्युरिटी का फायदा

संविदाकर्मियों को अब तक इंक्रीमेंट का फायदा नहीं मिलता था। कई विभागों में तो 6 हजार रुपए महीने पर संविदाकर्मी काम कर रहे हैं। जो संविदाकर्मी नियमित होंगे उन्हें अब इंक्रीमेंट मिलेगा और उनकी नौकरी सुरक्षित रहेगी। अब तक अलग-अलग विभागों में संविदाकर्मी बिना इंक्रीमेंट के एक फिक्स वेतन पर कई साल से काम कर रहे थे।

एजेंसी के जरिए लगे संविदाकर्मियों नहीं है इस योजना में शामिल 

राज्य सरकार ने कई सरकारी विभागों में प्लेसमेंट एजेंसी के जरिए कार्मिकों को संविदा पर ले रखा है। फिलहाल इन्हें नियमित होने का लाभ नहीं मिलेगा। अभी केवल शिक्षाकर्मियों, पैरा टीचर्स और पंचायत सहायकों को ही नियमित करने का फैसला लिया गया है। इनके पदनाम भी बदल दिए गए हैं। शिक्षाकर्मियों को अब शिक्षा सहायक, पैरा टीचर्स को पाठशाला सहायक और ग्राम पंचायत सहायकों को विद्यालय सहायक कहा जाएगा। चूंकि अलग अलग विभागों में तय योग्यता के बिना ही संविदाकर्मियों के काम पर लिया जा रहा है। इसी कारण उन्हें नियमित करने का निर्णय नहीं लिया गया है। शिक्षाकर्मी, पैरा टीचर्स और पंचायत सहायकों की संविदाकर्मी के रूप में नियुक्ति तय योग्यता के आधार पर की गई थी। ऐसे में इन्हें नियमित करने का निर्णय लिया गया।