इलेक्ट्रिक वाहनों को लंबी दूरी के सफर के लिए अधिक भरोसेमंद बनाने की दिशा में सरकार ने नई पहल शुरू की है। इसके तहत देश के प्रमुख एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्गों पर ईवी कमांड सेंटर, चार्जिंग स्टेशन और रास्ते में सहायता उपलब्ध कराने वाला (6096) सपोर्ट नेटवर्क तैयार किया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहन चालकों की सबसे बड़ी चिंता मानी जाने वाली ‘रेंज एंग्जायटी’ यानी सफर के दौरान बैटरी खत्म होने के डर को कम करना है, जिससे ईवी को अपनाने की गति और तेज हो सके।
एक्सप्रेसवे पर ईवी के लिए कमांड-कंट्रोल सिस्टम की तैयारी
प्रस्तावित व्यवस्था के अंतर्गत एक्सप्रेसवे पर इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए विशेष कमांड और कंट्रोल सेंटर स्थापित किए जाएंगे। ये केंद्र ईवी के लिए एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम की तरह कार्य करेंगे, जहां से सफर कर रहे वाहनों की निगरानी की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इन कमांड सेंटरों के माध्यम से रास्ते में बैटरी संबंधी दिक्कतों में मदद, चार्जिंग से जुड़ा मार्गदर्शन और वाहन की प्रारंभिक तकनीकी जांच जैसी सुविधाएं प्रदान की जा सकेंगी। इससे यदि कोई इलेक्ट्रिक वाहन तकनीकी कारणों या बैटरी समस्या के चलते बीच रास्ते में रुक जाता है, तो उसे तुरंत सहयोग मिल सकेगा।
सिर्फ चार्जिंग स्टेशन नहीं, रियल-टाइम सपोर्ट भी जरूरी
सरकार के स्तर पर यह समझ बन रही है कि केवल चार्जिंग स्टेशन स्थापित करना पर्याप्त नहीं है। जब तक सफर के दौरान इलेक्ट्रिक वाहनों को तकनीकी सहायता, आपात सेवाएं और रियल-टाइम सपोर्ट उपलब्ध नहीं होगा, तब तक लंबी दूरी की ईवी यात्रा को लेकर लोगों का भरोसा पूरी तरह मजबूत नहीं हो पाएगा। इसी सोच के तहत एक्सप्रेसवे आधारित ईवी सपोर्ट सिस्टम विकसित करने की योजना तैयार की जा रही है।
इसके साथ ही सरकार ईवी बैटरियों की एंड-टू-एंड ट्रैकिंग और बेहतर रीसाइक्लिंग व्यवस्था के लिए भी बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। सड़क परिवहन मंत्रालय ने ईवी बैटरियों को आधार की तरह एक यूनिक पहचान देने का प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत प्रत्येक बैटरी को 21 अंकों का बैटरी पैक आधार नंबर (बीपेन) जारी किया जाएगा। इससे बैटरी की पूरी जीवन-चक्र प्रक्रिया—निर्माण से लेकर उपयोग, रीसाइक्लिंग और अंतिम निपटान तक—की निगरानी संभव हो सकेगी।
सरकार का प्रस्ताव
सड़क परिवहन मंत्रालय द्वारा जारी ड्राफ्ट गाइडलाइंस के अनुसार, बैटरी निर्माता या आयातक को बाजार में उतारी जाने वाली प्रत्येक बैटरी के साथ-साथ अपने उपयोग में ली गई बैटरियों के लिए भी बीपेन जारी करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा बैटरी से संबंधित डायनामिक डेटा को बीपेन के आधिकारिक पोर्टल पर अपलोड करना भी जरूरी किया जाएगा। ड्राफ्ट दिशानिर्देशों में बीपेन व्यवस्था को 2 किलोवाट से अधिक क्षमता वाली औद्योगिक बैटरियों पर लागू करने का प्रस्ताव है, हालांकि प्रारंभिक चरण में इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियों को प्राथमिकता देने की बात कही गई है।









