दान को महान माना गया है, लेकिन क्यों? भीख को महान क्यों नहीं माना गया? | ‘DONATION’ is considered great, but why?

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नीरज राठौर

भीख और दान में अंतर होता है इसे इस उदाहरण से समझिये |

कोई व्यक्ति आपके घर आता है, और वह आपसे कुछ आर्थिक सहयोग मांगता है | आप उसे कहते हैं कि ठीक है मैं आपकी सहायता कर देता हूँ, लेकिन रकम लौटानी पड़ेगी आपको | तो यह हुआ उधार |

यदि उसे हज़ार रूपये की आवश्यकता है और आपके पर्स में हज़ार रूपये हैं | लेकिन आप उसे दो रूपये या पांच रूपये का सिक्का देकर कहते हैं ये लो और आगे बढ़ो | तो यह हुआ भीख |

यदि आपको पता चलता है कि किसी को स्कूटर, कार या ऐसी ही किसी कोई वस्तु की आवश्यकता है | और आपके पास वही वस्तु एक से अधिक है लेकिन वह बिलकुल सही स्थिति में है | जिसे आप अच्छी कीमत में बेच सकते हैं | फिर भी आप उसे जरूरतमंद को दे देते हैं, और बदले में कोई शर्त नहीं रखते और न ही कुछ मांगते हैं, तो यह हुआ दान |

बहुत से लोग दान और भीख का अर्थ एक ही लगा लेते हैं |

स्मरण रखें:

भीख और उधार में वही वस्तु दी जाती है, जिसका आपके लिए कोई बहुत बड़ा महत्व नहीं है | जैसे सौ पचास रूपये फेंक देना किसी सामने या बदले में कुछ ले लेना | जबकि दान उसे कहते हैं जिससे पाने और देने वाले, दोनों स्वयं को धन्य समझते हैं और ईश्वर का धन्यवाद् करते हैं |

भीख व उधार देने वाला यह मानता है कि वह किसी पर एहसान कर रहा है, और सामने वाले को उसका एहसानमंद होना चाहिए | जबकि दान देने वाला यह मानता है कि ईश्वर ने उसे अवसर प्रदान किया, किसी की सहायता करने का और इस योग्य बनाया कि वह किसी के काम आ सका |

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