Army Day : इस खास वजह से 15 जनवरी को मनाया जाता है सेना दिवस

हर परिस्थिति से निपटने और देश की रक्षा में सरहदों पर तैनात भारतीय सेना आज अपना 72 वां सेना दिवस मना रहे है। 1949 में आज ही के दिन फील्ड मार्शल केएम करियप्पा ने जनरल फ्रांसिस बुचर से भारतीय सेना की कमान ली थी। शौर्य और पराक्रम की गाथा गाने वाली भारतीय सेना में पुरुषों के साथ-साथ महिलाएं भी तत्पर है।

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हर परिस्थिति से निपटने और देश की रक्षा में सरहदों पर तैनात भारतीय सेना आज अपना 72 वां सेना दिवस मना रहे है। 1949 में आज ही के दिन फील्ड मार्शल केएम करियप्पा ने जनरल फ्रांसिस बुचर से भारतीय सेना की कमान ली थी। शौर्य और पराक्रम की गाथा गाने वाली भारतीय सेना में पुरुषों के साथ-साथ महिलाएं भी तत्पर है। यह दिन सैन्य परेडों, सैन्य प्रदर्शनियों व अन्य कार्यक्रमों के साथ नई दिल्ली व सभी सेना मुख्यालयों में मनाया जाता है।

आजादी के बाद देश में कई प्रशासनिक समस्याएं पैदा होने लगी और फिर स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सेना को आगे आना पड़ा। भारतीय सेना के अध्यक्ष तब भी ब्रिटिश मूल के ही हुआ करते थे। 15 जनवरी 1949 को फील्ड मार्शल के एम करिअप्पा स्वतंत्र भारत के पहले भारतीय सेना प्रमुख बने थे। उस समय सेना में लगभग 2 लाख सैनिक थे और केएम करियप्पा के सेना प्रमुख बनाए जाने के बाद से ही हर साल 15 जनवरी को सेना दिवस मनाया जाने लगा।

ये हैं केएम करियप्पा से जुड़ी कुछ खास बातें

  • केएम करियप्पा को फील्ड मार्शल की उपाधि दी गई थी। भारतीय इतिहास में अभी तक यह उपाधि सिर्फ दो अधिकारियों को दी गई है।
  • उन्होंने सन् 1947 के भारत-पाक युद्ध में पश्चिमी सीमा पर भारतीय सेना का नेतृत्व किया था।
  • 1899 में कर्नाटक के कुर्ग में जन्मे फील्ड मार्शल करिअप्पा ने महज 20 वर्ष की उम्र में ब्रिटिश इंडियन आर्मी में नौकरी की शुरुआत की थी।
  • करिअप्पा साल 1953 में रिटायर हुए थे और 1993 में 94 साल की आयु में उनका निधन हुआ था।

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