UNSC में बेइज्जती के बाद पाकिस्तान फिर अमेरिका के आगे गिड़गिड़ाया, ट्रंप बोले- साॅरी

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नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाए जाने के बाद से पाकिस्तान तिलमिलाया हुआ। इस मामले में चीन को छोड़ किसी भी देश से मदद नहीं मिल पा रही है। इसी बीच यूएनएससी में मुंह की खाने के बाद पाकिस्तान फिर से अमेरिकी की शरण में पहुंच गया है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से टेलीफोन पर 20 मिनट तक चर्चा की। इस दौरान इमरान खान ने ट्रंप से कश्मीर मुद्दे पर साथ देने की अपील की।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इमरान खान की अपील पर ट्रंप ने कहा कि कश्मीर मसला दोनों देशों का आपसी मामला है। इस पर हम कुछ नहीं कर सकते हैं साॅरी। और यही बात खत्म हो गई। पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा कि इमरान खान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति को विश्वास में लिया है। पीएम कई देशों के संपर्क में हैं और कश्मीर मुद्दे पर वैश्विक समर्थन जुटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इससे पहले कश्मीर मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का समर्थन पाने में नाकाम हो रहे इमरान खान ने स्रेब्रेनिका नरसंहार का जिक्र करते हुए दुनिया को डराने की कोशिश की।

इमरान खान ने 15 अगस्त को अपने ट्वीट में पूछा कि क्या दुनिया चुपचाप स्रेब्रेनिका की तरह नरसंहार देखेगी, जहां मुसलमानों का सफाया किया जाएगा। मैं अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चेतावनी देता हूं कि अगर ऐसा हुआ तो मुस्लिम देशों में इसके गंभीर परिणाम देखने को मिलेंगे। इमरान खान ने यह यह आरोप भी लगाया कि भारत की केंद्र सरकार जम्मू और कश्मीर में नरसंहार कराने की तैयारी में है।

भारत की दो टूक- कश्मीर हमारा अंदरूनी मसला, जबरन कोई दखल न दें

इधर, संयुक्त राष्ट्र में भारत के एंबेसडर सैयद अकबरुद्दीन ने बैठक के बाद कश्मीर मामले में भारत का पक्ष रखा और चीन पाकिस्तान को खरी-खरी सुनाई। अकबरुद्दीन ने कहा कि ये पूरी तरह से भारत का अंदरूनी मसला है। ये भारत की संवैधानिक व्यवस्थाओं के तह उठाया गया कदम है। किसी दूसरे देश का इससे कोई लेना देना नहीं है। अकबरुद्दीन ने कहा कि हमने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों के बेहतर भविष्य के लिए ये फैसला किया है। अकबरुद्दीन ने कहा कि एक देश वहां जेहाद का इस्तेमाल कर रहा है और हिंसा भड़काने की कोशिश कर रहा है। भारत पाकिस्तान या दुनिया के किसी भी मुद्दे का हल बातचीत ही है। भारत और पाकिस्तान के बीच 1972 में समझौता हुआ और हम उस पर कायम हैं। हम उम्मीद करते हैं पाकिस्तान भी इस पर कायम रहेगा।

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