Homemoreसहजता और करुणा को अपनाना ही कबीर को सच्ची श्रद्धांजलि है

सहजता और करुणा को अपनाना ही कबीर को सच्ची श्रद्धांजलि है

इंदौर लिटरेचर फेस्टिवल के आज दोपहर के सत्र में डॉ पुरुषोत्तम अग्रवाल ने अकथ कहानी प्रेम की कबीर के हवाले से विषय पर बोलते हुए कहा कि कबीर दास जी को यदि सच्ची श्रद्धांजलि देना है...

इंदौर लिटरेचर फेस्टिवल के आज दोपहर के सत्र में डॉ पुरुषोत्तम अग्रवाल ने अकथ कहानी प्रेम की कबीर के हवाले से विषय पर बोलते हुए कहा कि कबीर दास जी को यदि सच्ची श्रद्धांजलि देना है तो हमें जीवन में सहजता और करुणा को अपनाना पड़ेगा।

कबीर दास जी ने प्रेम की सच्ची परिभाषा दी है उन्होंने कहा है कि प्रेम ही मनुष्य को जोड़ता है कबीर दास जी अवतारवाद का खंडन भी करते हैं लेकिन इसके बावजूद वे राम गोविंद गोपाल मोहन आदि का नाम लेते हैं।

कबीर के लिए अल्लाह और राम में कोई फर्क नहीं है कबीर जी परम सत्ता के वाचक हैं कबीर दास जी भगवान को भी प्रेम की अभिव्यक्ति बताते हैं। हमारी सबसे बड़ी इच्छा मरने के बाद भी अमर रहने की है। सब जानते हैं कि अपने साथ कुछ भी नहीं जाता लेकिन इसके बावजूद आदमी संग्रह करता है।

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