सीएम मोहन यादव ने लिए अहम फैसले, एमपी के विकास के लिए 1 लाख 46 हजार करोड़ रुपए स्वीकृत

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By Raj RathorePublished On: August 18, 2026

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 18 अगस्त को कैबिनेट की मीटिंग में कई अहम फैसलों पर मुहर लगाई। बैठक में कैबिनेट ने प्रदेश को जीवनदायिनी नर्मदा नदी के संरक्षण, पुनर्जीवन और दीर्घकालीन सतत प्रबंधन के लिए ‘निर्मल एवं अविरल माँ नर्मदा मिशन (नमन मिशन)’ के गठन की स्वीकृति दी है।

मध्य प्रदेश की लगभग 33 प्रतिशत आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से नर्मदा नदी और उसके जलग्रहण क्षेत्र पर निर्भर है, जिसे ध्यान में रखते हुए इस मिशन को एकीकृत, वैज्ञानिक और बहु-विभागीय संस्थागत व्यवस्था के रूप में विकसित किया गया है।

‘नमन मिशन’ को मप्र सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम, 1973 के तहत एक स्वायत्त संस्था के रूप में पंजीकृत किया जाएगा, जो पूर्व में गठित मंत्रिमंडल समिति, अन्तर्विभागीय कार्यकारिणी समिति और राज्य स्तरीय अनुश्रवण समिति की प्राथमिकताओं व अनुश्रवण तंत्र को समाहित कर सुदृढ़ कार्ययोजना पर कार्य करेगा।नमन मिशन का प्रशासनिक ढांचा त्रि-स्तरीय रखा गया है।

सर्वोच्च साधारण सभा की अध्यक्षता मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे और इसमें पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री उपाध्यक्ष तथा 19 सहभागी विभागों के मंत्रीगण सदस्य होंगे। इसके अलावा साधारण सभा में नदी विज्ञान, जल विज्ञान, पर्यावरण, जैव विविधता और सामुदायिक प्रबंधन क्षेत्र के अधिकतम 10 प्रतिष्ठित विशेषज्ञ भी नामांकित किए जाएंगे।

वहीं, मिशन की प्रशासनिक कार्यकारिणी समिति के अध्यक्ष मुख्य सचिव होंगे, जबकि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव उपाध्यक्ष और संचालन के लिए मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) कार्यकारिणी के सदस्य सचिव के रूप में कार्य करेंगे।l

मिशन का होगा मजबूत वित्तीय ढांचा

मिशन के सुचारू संचालन और परियोजनाओं के निष्पादन के लिए एक मजबूत वित्तीय ढांचा तैयार किया गया है। नर्मदा संरक्षण व विकास कार्यों के लिए ‘निर्मल एवं अविरल नर्मदा मिशन निधि’ के तहत राज्य अनुदान से प्रतिवर्ष 100 करोड़ रुपये दिए जाएंगे।

इसके अतिरिक्त, वन विभाग की कैम्पा (CAMPA) निधि से प्रतिवर्ष 100 करोड़ रुपये का उपयोग किया जाएगा तथा आपवादिक परिस्थितियों में प्रचलित योजनाओं से भिन्न कार्यों के लिए 5 वर्षों में राज्य बजट से 100 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराई जाएगी। मिशन में सीएसआर (CSR) फंड, केंद्रीय सहायता और पीपीपी (PPP) मॉडल के माध्यम से भी जन-सहयोग जुटाया जाएगा।

प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट करेगी वैज्ञानिक मूल्यांकन 

तकनीकी दक्षता के लिए गठित की जा रही प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (PMU) एक टेक-इंजन और नवाचार केंद्र के रूप में कार्य करेगी। यह इकाई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा एनालिटिक्स, जीआईएस (GIS), रिमोट सेंसिंग, डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (DSS) और जलवायु परिवर्तन मॉडलिंग जैसी आधुनिक प्रणालियों का उपयोग कर नदी स्वास्थ्य का वैज्ञानिक मूल्यांकन करेगी।

कैबिनेट ने मिशनशक्ति- उपयोजना सामर्थ्य अंतर्गत केन्द्र प्रवर्तित योजना “प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना” की वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरन्तरता एवं क्रियान्वयन के लिए 2,137 करोड़ 65 लाख रुपये की स्वीकृति दी है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को मजदूरी की हानि की आंशिक क्षतिपूर्ति के रूप में नकद प्रोत्साहन प्रदान करना एवं द्वितीय प्रसव में बालिका जन्म को प्रोत्साहन प्रदान करना है।

योजना अन्तर्गत प्रथम प्रसव वाली पात्र गर्भवती महिला को गर्भावस्था का शीघ्र पंजीकरण एवं अंतिम मासिक चक्र (एल.एम.पी) के 6 माह के अंदर कम से कम एक प्रसव पूर्व जांच कराने पर प्रथम किश्त तीन हजार रुपये और बच्चे के जन्म के पंजीकरण एवं प्रथम चक्र का टीकाकरण पूर्ण होने पर द्वितीय किश्त दो हजार रुपये, इस प्रकार कुल 5 हजार रुपये तथा द्वितीय प्रसव पर बालिका जन्म पर प्रथम चक्र का टीकाकरण पूर्ण होने के पश्चात् 6 हजार रुपये का लाभ एक किश्त में प्रदान किए जाने का प्रावधान है।

मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना पर फोकस

कैबिनेट ने “मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना” के वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरन्तर संचालन के लिए 1 लाख 14 हजार 365 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है।प्रदेश में महिला सशक्तिकरण की दिशा में महिलाओं के आर्थिक स्वालंबन, उनके स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर में सतत् सुधार एवं परिवार के निर्णयों में उनकी भूमिका सुदृढ़ करने के लिए मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना 2023, लागू की गई है।

योजना के प्रावधानों के अनुसार लाभार्थी महिलाओं को प्रत्येक माह 1500 रुपये मासिक आर्थिक सहायता राशि को उनके डीबीटी सक्रिय खाते में प्रदाय किया जा रहा है। वर्तमान में लाड़ली बहना योजना अन्तर्गत लगभग 1.27 करोड़ महिलाएं लाभान्वित की जा रही हैं।

मध्यप्रदेश लाड़ली लक्ष्मी योजना का रखा ध्यान

मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश लाड़ली लक्ष्मी योजना का वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतर संचालन के लिए 16 हजार 326.47 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है।बालिका जन्म के प्रति जनता में सकारात्मक सोच, लिंग अनुपात में सुधार, बालिकाओं के शैक्षणिक स्तर, स्वास्थ्य की स्थिति में सुधार और उनके अच्छे भविष्य की आधारशिला रखने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश लाड़ली लक्ष्मी योजना लागू की गई है।

योजना में अब तक लगभग 50.99 लाख बालिकाओं को लाभांवित किया जा चुका है। योजना अंतर्गत पात्र हितग्राहियों को कक्षा 6वीं में प्रवेश पर 2 हजार रुपये, कक्षा 9वीं में प्रवेश पर 4 हजार रुपये, कक्षा 11वीं में प्रवेश पर रुपये 6 हजार रुपये और कक्षा 12वीं में प्रवेश पर 6 हजार रुपये ई-पेंमेंट के माध्यम से प्रदाय किया जाता है। महाविद्यालय में प्रवेश लेने पर प्रथम वर्ष में प्रोत्साहन राशि 12,500 रुपये एवं अंतिम वर्ष में 12,500 रुपये दो समान किश्तों में प्रदाय किया जाता है। साथ ही 21 वर्ष की आयु पूर्ण करने पर 1 लाख रुपये का भुगतान किया जाता है।

कृषि, शिक्षा एवं अनुसंधान गतिविधियों के लिए 870 करोड़ 16 लाख रुपये की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद ने किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग अंतर्गत तीन योजनाओं की 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 की अवधि तक संचालन की निरंतरता के लिए 870 करोड़ 16 लाख रुपये की स्वीकृति दी है। स्वीकृति अनुसार जवाहरलाल नेहरु कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर स्ववित्तीय पेंशन योजना के लिए 310 करोड़ 23 लाख रुपये स्वीकृत किए गए है। इससे विश्वविद्यालय के सेवानिवृत अधिकारियों एवं कर्मचारियों को पेंशन का नियमित भुगतान किया जाता है।

राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर को ब्लाक ग्रांट योजना के लिए 469 करोड़ 93 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई है।विश्वविद्यालय प्रदेश में कृषि शिक्षा, अनुसंधान एवं कृषि विस्तार गतिविधियों का प्रमुख केन्द्र है।

ब्लॉक ग्रांट योजना के माध्यम से अधिकारियों, वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों के वेतन-भत्तों, अनुसंधान गतिविधियों, संस्थागत व्ययों तथा अन्य अनुमत्य वित्तीय दायित्वों का नियमित निर्वहन किया जाता है। योजना की निरंतरता विश्वविद्यालय की संस्थागत क्षमता, शैक्षणिक गुणवत्ता एवं कृषि विकास कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक हैं।

इसके साथ ही कृषि क्षेत्र में अधोसंरचना विकास योजना के लिए 90 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए है। योजना के माध्यम से प्रयोगशालाओं, प्रशिक्षण सुविधाओं, अनुसंधान अधोसंरचना तथा अन्य आवश्यक परिसंपत्तियों का विकास एवं उन्नयन किया जाता है। योजना की निरंतरता से विभाग एवं कृषि विश्वविद्यालयों की संस्थागत क्षमता सुदृढ़ होगी और कृषि क्षेत्र की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप आधारभूत सुविधाओं का विकास सुनिश्चित होगा।

स्वास्थ्य सेवाओं के उन्नयन एवं सुदृ‌ढ़ीकरण के लिए इतनी राशि स्वीकृत

मंत्रि-परिषद ने प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के उन्नयन एवं सुदृ‌ढ़ीकरणके लिए कुल 11 हजार 835.35 करोड़ रुपये की स्वीकृतिदी है।स्वीकृति अनुसार उप स्वास्थ्य केन्द्र योजना के लिए 4,742 करोड़ 45 लाख रुपये स्वीकृत किए गये है। उप स्वास्थ्य केन्द्र योजना के अंतर्गत प्रदेश के समस्त मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों के अधीन कार्यरत ए.एन.एम.-एल.एच.व्ही. का वेतन आहरित किया जाता है। यह योजना मुख्य रूप से मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालयों के लिए ही संचालित हैं। स्वास्थ्य सेवाओं का उन्नयन एवं सुदृ‌ढ़ीकरण योजना के लिए 518 करोड़ 93 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है।

स्वास्थ्य सेवाओं का उन्नयन एवं सुदृ‌ढ़ीकरण योजना के अंतर्गत प्रदेश के समस्त मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी और सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक तथा उप स्वास्थ्य केन्द्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में आंतरिक एवं बाह्य रोगियों के उपचार के लिए लगने वाले अत्याधुनिक उपकरणों का प्रबंध किया जाता हैं। अस्पताल एवं औषधालय के लिए भवन निर्माण योजना के लिए 3,219 करोड़ 22 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है। योजनांर्गत प्रदेश के विभिन्न चिकित्सालयों जैसे प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, उप स्वास्थ्य केन्द्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, जिला चिकित्सालय एवं सिविल अस्पताल के भवनों का उन्नयन तथा भवन निर्माण कार्य किया जाता है।

आशा कार्यकर्ता को अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि प्रदाय करने संबंधी योजना के लिए 3,354 करोड़ 75 लाख रुपये स्वीकृत किए गए है। आशा कार्यकर्ता स्वास्थ्य विभाग की जमीनी कड़ी हैं, जो घर-घर जाकर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, पोषण, टीवी, मलेरिया, कुपोषण तथा अन्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की जानकारी, सेवा और समर्थन प्रदान करती हैं।