80वें स्वतंत्रता दिवस पर 15 अगस्त को पूरा मध्यप्रदेश देशभक्ति के रंग में रंग गया। चारों ओर तिरंगा लहराया और देशभक्ति गीतों ने युवाओं को उत्साह से भर दिया। इस बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल के लाल परेड ग्राउंड पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में ध्वजारोहण किया।
ध्वजारोहण से पहले राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम का गायन हुआ और ध्वजारोहण के बाद राष्ट्रगान जन-गण-मन की धुन बजाई गई। उसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने परेड का निरीक्षण किया और सलामी ली।
परेड में सशस्त्र दलों ने हर्ष फायर किया और पुलिस बैंड ने देश भक्ति गीतों की धुनों से वातावरण में राष्ट्र प्रेम और समर्पण के भाव का संचार किया। परेड में पुलिस बैंड सहित कुल 22 टुकड़ियों ने भाग लिया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के नाम अपने संदेश में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC), किसान, खेत, निवेश, शिक्षा, युवा, वन, धर्म-संस्कृति सहित हर क्षेत्र का जिक्र किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर, आप सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। मैं प्रदेश के साढ़े आठ करोड़ नागरिकों की ओर से आजादी के सभी जननायकों और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के चरणों में, कोटि-कोटि वन्दन करता हूं।
स्वाधीनता के इस संग्राम में, रानी दुर्गावती, रानी अवंती बाई, महाराजा छत्रसाल और टंट्या मामा भील से लेकर चंद्रशेखर आजाद तक मध्यप्रदेश के अनगिनत वीर सपूतों ने भी अपनी आहुतियां दी हैं। कृतज्ञ मध्यप्रदेश आज उन सभी को श्रृद्धा पूर्वक नमन करता है। उन्होंने कहा मैं मध्यप्रदेशवासियों की ओर से, पुलिस और हॉक फोर्स के उन वीर जवानों को श्रृद्धांजलि अर्पित करता हूं, जो आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर, असीम शौर्य का परिचय देते हुए, वीरगति को प्राप्त हुए।
ऐसे ही जांबाजों की बदौलत, नक्सल मुक्त प्रदेश बनाने की ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई है। पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल ने, भारत वर्ष की महिमा को इन पंक्तियों में व्यक्त किया है, ‘भारत जमीन का टुकड़ा नहीं, जीता जागता राष्ट्रपुरूष है, हिमालय मस्तक है, कश्मीर किरीट है, पंजाब और बंगाल दो विशाल कंधे हैं।
पूर्वी और पश्चिमी घाट दो विशाल जंघाएं हैं। कन्याकुमारी इसके चरण हैं, सागर इसके पग पखारता है। यह चन्दन की भूमि है, अभिनन्दन की भूमि है, यह तर्पण की भूमि है, यह अर्पण की भूमि है। इसका कंकर-कंकर शंकर है, इसका बिन्दु-बिन्दु गंगाजल है। हम जिएंगे तो इसके लिए, मरेंगे तो इसके लिए।’










