विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर शुक्रवार को भाजपा कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भारत विभाजन के इतिहास, वोट बैंक की राजनीति और पश्चिम बंगाल में घुसपैठ के मुद्दे पर विपक्षी दलों पर निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि विभाजन के इतिहास को याद करने का उद्देश्य किसी समाज के प्रति नफरत पैदा करना नहीं, बल्कि अतीत की गलतियों से सीख लेकर उनकी पुनरावृत्ति रोकना है।
विजयवर्गीय ने कहा कि 14 अगस्त भारत के इतिहास का एक दर्दनाक दिन है। 15 अगस्त को देश आजादी का जश्न मना रहा था, वहीं विभाजन के कारण लाखों लोगों को विस्थापन, हिंसा और पीड़ा का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को इस इतिहास और इसके पीछे छिपे दर्द की जानकारी होना जरूरी है।
पश्चिम बंगाल को किया याद
पश्चिम बंगाल में अपने प्रभारी रहने के दौरान के अनुभव साझा करते हुए विजयवर्गीय ने आरोप लगाया कि वहां की सरकार घुसपैठियों को संरक्षण देती थी और उनके आधार कार्ड बनवाकर आबादी बढ़ाने का प्रयास किया जाता था। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती जिलों में जनसंख्या का संतुलन प्रभावित हुआ है।
उन्होंने मुर्शिदाबाद का जिक्र करते हुए कहा कि एक बार वहां उन्हें करीब दो हजार लोगों ने घेर लिया था। विजयवर्गीय ने कहा कि कई राजनीतिक दल सत्ता और कुर्सी की चिंता करते हैं, जबकि भाजपा देशहित को प्राथमिकता देती है।
जोगेंद्रनाथ मंडल का उदाहरण देकर साधा निशाना
विजयवर्गीय ने अपने संबोधन में दलित नेता जोगेंद्रनाथ मंडल का उदाहरण देते हुए जातिवाद और वोट बैंक की राजनीति पर भी बात की। उन्होंने कहा कि मंडल को पाकिस्तान में दलितों के सम्मान और अधिकारों का भरोसा दिलाया गया था, लेकिन बाद में वहां अत्याचार होने लगे।
उन्होंने कहा कि मंडल ने इसका विरोध किया और अंततः पाकिस्तान सरकार से इस्तीफा देकर भारत लौट आए। विजयवर्गीय ने कहा कि देश जाति के बंटवारे से मजबूत नहीं होगा, बल्कि सामाजिक एकता से मजबूत होगा।
विभाजन में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की भूमिका का किया उल्लेख
कैबिनेट मंत्री ने विभाजन के दौरान डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पंजाब और बंगाल के बचे हुए हिस्से को भारत में बनाए रखने के संघर्ष में मुखर्जी का महत्वपूर्ण योगदान था।
विजयवर्गीय ने वर्ष 1929 में लाहौर में रावी नदी के तट पर कांग्रेस के पूर्ण स्वराज के संकल्प का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि विभाजन के बाद उस संकल्प का कितना हिस्सा भारत के पास रह गया। उन्होंने कहा कि रावी समेत पंजाब की कई नदियां अब भारत की सीमाओं के भीतर नहीं हैं।
आने वाली पीढ़ी को बताना होगा विभाजन का इतिहास
विजयवर्गीय ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखाओं में 14 अगस्त को अखंड भारत दिवस मनाने की परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि देश की नई पीढ़ी को इतिहास की घटनाओं और विभाजन के दौरान लोगों द्वारा झेले गए दर्द के बारे में जानकारी होना जरूरी है।
कार्यक्रम के दौरान विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी गई। साथ ही स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को याद करते हुए देश की एकता और अखंडता के लिए इतिहास से सीख लेने का संकल्प लिया गया।










