बिहान योजना से मिली नई पहचान, पशु सखी बन आत्मनिर्भर हुईं तैलासो राजवाड़े, हर माह 10 से 15 हजार रुपये की आय

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By Raj RathorePublished On: July 4, 2026
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राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ’’बिहान’’ से जुड़कर ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आ रहा है। इसी का प्रेरक उदाहरण सरगुजा जिले के विकासखंड अंबिकापुर की तैलासो राजवाड़े हैं, जो महादेव स्वयं सहायता समूह, रोशनी ग्राम संगठन (वीओ) एवं समृद्ध सरगुजा संकुल से जुड़ी हुई हैं। वे पिछले दो वर्षों से पशु सखी के रूप में कार्य करते हुए आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनी हैं और अपने परिवार की जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन कर रही हैं।

तैलासो राजवाड़े बताती हैं कि बिहान योजना से जुड़ने के बाद उन्हें आजीविका का सशक्त माध्यम मिला। वर्तमान में वे पशुपालकों को बकरियों की देखभाल, टीकाकरण के प्रति जागरूकता, समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण एवं आवश्यक दवाइयों की जानकारी उपलब्ध कराती हैं। इस कार्य से उन्हें प्रतिमाह लगभग 10 से 15 हजार रुपये की आय प्राप्त हो रही है, जिससे उनके परिवार का भरण-पोषण एवं बच्चों की पढ़ाई सुचारु रूप से चल रही है।

उन्होंने बताया कि उनके तीन बच्चे हैं, जिनमें बड़ा बेटा कक्षा 12वीं, दूसरा कक्षा 10वीं तथा सबसे छोटा कक्षा 8वीं में अध्ययनरत है। पहले आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, लेकिन आज स्वयं की आय से वे परिवार की आवश्यकताओं को पूरा कर पा रही हैं।

तैलासो ने बताया कि उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र में प्रशिक्षण प्राप्त किया है, जहां पशुपालन एवं बकरियों के स्वास्थ्य प्रबंधन संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। उन्होंने कहा कि यदि पशु सखियों को नियमित रूप से उन्नत प्रशिक्षण एवं टीकाकरण संबंधी संसाधन उपलब्ध कराए जाएं तो वे ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों को और बेहतर सेवाएं प्रदान कर सकेंगी।

उन्होंने यह भी बताया कि बिहान योजना के माध्यम से उन्हें आजीविका संवर्धन के लिए विभिन्न अवसर प्राप्त हुए हैं। योजना से मिली सहायता के आधार पर उन्होंने अपने खेत में बोर खुदवाया है तथा धान की खेती शुरू की है। भविष्य में वे सब्जी उत्पादन कर अपनी आय में और वृद्धि करने की योजना बना रही हैं।