Pintu Chhabra : शहर के प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों में शामिल एबी रोड स्थित C-21 मॉल एक बार फिर विवादों में आ गया है। मॉल संचालक पिंटू छाबड़ा पर आरोप है कि उन्होंने नगर निगम के कुछ कर्मचारियों से मिलीभगत कर परिसर में नियमों के विपरीत निजी कंपनियों के यूनिपोल और विज्ञापन बोर्ड लगवाए, जिससे नगर निगम को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंच रहा है।
आरोप है कि मॉल परिसर में केवल मॉल अथवा उसके व्यवसाय से जुड़े विज्ञापन लगाए जा सकते हैं, लेकिन इसके बावजूद कई निजी कंपनियों के यूनिपोल और लॉलीपॉप विज्ञापन बोर्ड लगाए गए हैं।
दावा किया जा रहा है कि इन विज्ञापनों से मॉल प्रबंधन को हर महीने करीब डेढ़ करोड़ रुपये की आय हो रही है, जबकि नगर निगम को विज्ञापन कर के रूप में कोई राशि प्राप्त नहीं हो रही।
निगम कर्मचारी पर मिलीभगत के आरोप
मामले में नगर निगम के मार्केट विभाग के कर्मचारी राकेश चौहान पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि उन्होंने नियमों की अनदेखी करते हुए इन विज्ञापन संरचनाओं को संरक्षण दिया। यह भी कहा जा रहा है कि इससे पहले भी एमआर-10 मार्ग पर यूनिपोल और कथित फर्जी लॉलीपॉप विज्ञापन बोर्ड के मामले में उनका नाम सामने आ चुका है।
नोटिस जारी, कार्रवाई अधर में
सूत्रों के अनुसार, मामला सामने आने के बाद नगर निगम के मार्केट विभाग ने मॉल प्रबंधन को लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की पेनल्टी का नोटिस जारी किया। हालांकि, मॉल प्रबंधन ने नोटिस का जवाब प्रस्तुत कर आरोपों से इनकार किया।
बताया जा रहा है कि नोटिस के बाद मौके पर कार्रवाई की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी को सौंपी गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
उठ रहे कई सवाल
इस पूरे मामले के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं—
- क्या नगर निगम की अनुमति के बिना निजी कंपनियों के विज्ञापन लगाए गए?
- यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
- नगर निगम को हुए राजस्व नुकसान की भरपाई कौन करेगा?
- क्या पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी?
यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला नगर निगम के राजस्व और विज्ञापन नियमों से जुड़ा बड़ा घोटाला साबित हो सकता है।










