PWD Chief Engineer KPS Rana : मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग (PWD) के प्रमुख अभियंता के.पी.एस. राणा एक बार फिर विवादों में हैं। इस बार मामला केवल विभागीय कार्यशैली या ठेके आवंटन तक सीमित नहीं, बल्कि उनके मूल निवास और आरक्षण लाभ से जुड़ा बताया जा रहा है।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि राणा ने मध्यप्रदेश में अनुसूचित जाति आरक्षण का लाभ लेकर नौकरी हासिल की, जबकि उनका मूल निवास उत्तरप्रदेश का है। इस पूरे मामले को लेकर विभाग से लेकर मंत्रालय तक शिकायतें पहुंच चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस जांच सामने नहीं आई है।
आरक्षण लाभ और मूल निवास पर उठे सवाल
बताया जा रहा है कि के.पी.एस. राणा ने वर्ष 1992 में लोक निर्माण विभाग में सहायक यंत्री के रूप में नियुक्ति ली थी। उस दौरान उन्होंने टीकमगढ़ जिले के पेतपुरा गांव का निवास प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया था। इसी आधार पर उनकी विभाग में नियुक्ति हुई और बाद में वे विभिन्न पदों पर पदोन्नत होते हुए प्रमुख अभियंता के पद तक पहुंचे।
हालांकि अब शिकायतकर्ताओं का दावा है कि राणा मूल रूप से उत्तरप्रदेश के झांसी जिले के मऊरानीपुर क्षेत्र के निवासी हैं। आरोपों के अनुसार उनका पैतृक घर मऊरानीपुर के गंज मोहल्ले में है और उनके परिवार के कई सदस्य आज भी वहीं निवास करते हैं।
परिवार के सदस्यों को लेकर भी उठे सवाल
शिकायत में कहा गया है कि राणा के सगे चाचा आत्माराम भड़सइयां और उनके भाई मानिकचंद व खूबचंद भड़सइयां आज भी उत्तरप्रदेश में रहते हैं। ऐसे में सवाल उठाया जा रहा है कि यदि परिवार उत्तरप्रदेश का मूल निवासी है, तो मध्यप्रदेश में अनुसूचित जाति आरक्षण का लाभ किस आधार पर लिया गया।
संविधान के आरक्षण नियमों के अनुसार अनुसूचित जाति का लाभ संबंधित व्यक्ति को उसके मूल राज्य में ही दिया जा सकता है। यदि कोई व्यक्ति दूसरे राज्य में निवास करता है, तो वह वहां अनुसूचित जाति आरक्षण का पात्र नहीं माना जाता। इसी आधार पर शिकायतकर्ताओं ने राणा की नियुक्ति और सेवा रिकॉर्ड की जांच की मांग उठाई है।
विभाग में पहले भी सामने आ चुका ऐसा मामला
पीडब्ल्यूडी विभाग में पहले भी ऐसा मामला सामने आ चुका है। विलाश भूगांवकर प्रकरण का उदाहरण देते हुए शिकायतकर्ता दावा कर रहे हैं कि दूसरे राज्य के मूल निवासी होने के बावजूद आरक्षण लाभ लेने पर कार्रवाई संभव है। उस मामले में सुप्रीम कोर्ट तक सुनवाई हुई थी और संबंधित अधिकारी के प्रमोशन निरस्त कर दिए गए थे।
इसी वजह से अब के.पी.एस. राणा के मामले को भी गंभीरता से देखा जा रहा है। हालांकि अभी तक विभाग या सरकार की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
ठेके आवंटन को लेकर भी रहे चर्चा में
राणा पहले भी विभाग में कथित रूप से अपने चहेते ठेकेदारों को नियम विरुद्ध लाभ पहुंचाने के आरोपों को लेकर चर्चा में रह चुके हैं। अब मूल निवास और आरक्षण को लेकर उठे सवालों ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है।
फिलहाल शिकायतकर्ताओं की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि कोई तथ्य गलत पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।










