Indore News : मध्य प्रदेश भाजपा में संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर अंदरूनी खींचतान तेज होती नजर आ रही है। इंदौर ग्रामीण भाजपा में महिला मोर्चा जिला अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर राज्यसभा सांसद कविता पाटीदार और विधायक उषा ठाकुर के बीच सियासी टकराव खुलकर सामने आने लगा है। दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से चल रही नाराजगी अब संगठनात्मक नियुक्तियों तक पहुंच गई है।
सूत्रों के मुताबिक, महिला मोर्चा अध्यक्ष पद पर अपनी-अपनी समर्थक को जिम्मेदारी दिलाने के लिए दोनों नेताओं ने संगठन पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। बढ़ते विवाद को देखते हुए भाजपा संगठन अब दूसरे विधानसभा क्षेत्रों से नामों पर भी विचार कर रहा है, ताकि विवाद से बचा जा सके।
विधानसभा चुनाव के बाद और बढ़ी दूरी
भाजपा के अंदर यह तनातनी नई नहीं है। विधानसभा चुनाव से पहले भी कविता पाटीदार और उषा ठाकुर के बीच मतभेद की चर्चाएं रही थीं। बताया जाता है कि विधायक उषा ठाकुर अपनी विधानसभा क्षेत्र में बाहरी हस्तक्षेप पसंद नहीं करतीं, जबकि कविता पाटीदार इंदौर ग्रामीण क्षेत्र में अपनी राजनीतिक पकड़ बनाए रखना चाहती हैं।
सूत्रों का दावा है कि विधानसभा चुनाव के दौरान बगावत करने वाले कुछ नेताओं को अप्रत्यक्ष रूप से सांसद गुट का समर्थन मिला था। बाद में उन पर कार्रवाई नहीं होने से भी विधायक खेमे में नाराजगी बढ़ी।
महिला मोर्चा अध्यक्ष पद पर रस्साकशी
महिला मोर्चा अध्यक्ष पद के लिए सांसद कविता पाटीदार ने माया पटेल (गुर्जर) का नाम आगे बढ़ाया है, जबकि विधायक उषा ठाकुर मानपुर क्षेत्र की सीमा पटेल को जिम्मेदारी दिलाना चाहती हैं। दोनों नेता अपने-अपने समर्थकों के पक्ष में सक्रिय बताए जा रहे हैं।
हालांकि संगठन फिलहाल विवाद से बचने के लिए दूसरे क्षेत्रों की दावेदारों के नामों पर भी मंथन कर रहा है।
कई दावेदार मैदान में
जिला महिला मोर्चा अध्यक्ष पद के लिए आधा दर्जन से अधिक नाम चर्चा में हैं। इनमें देपालपुर से हेमलता डांगर और पूजा मंडोवरा, राऊ से किरण सूर्यवंशी और शारदा कुशवाह, जबकि सांवेर से पूजा यादव का नाम सामने आ रहा है। वर्तमान अध्यक्ष किरण सूर्यवंशी भी दोबारा जिम्मेदारी चाहती हैं।
संतुलन साधने की कोशिश
भाजपा संगठन इंदौर ग्रामीण इकाई में सभी विधानसभा क्षेत्रों को संतुलित प्रतिनिधित्व देने की रणनीति पर काम कर रहा है। महू क्षेत्र में आदिवासी आबादी अधिक होने के कारण अनुसूचित जनजाति मोर्चा की जिम्मेदारी वहां दिए जाने की संभावना है, जबकि अन्य मोर्चों में सांवेर और महू क्षेत्र को ज्यादा प्रतिनिधित्व मिल सकता है।
पहले भी सामने आ चुका है विवाद
कुछ समय पहले महू में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान भी दोनों नेताओं के बीच नाराजगी सामने आई थी। कार्यक्रम के शिलालेख में कविता पाटीदार का नाम नहीं होने पर उन्होंने नाराजगी जाहिर की थी और इसे अपना अपमान बताया था।
अब महिला मोर्चा नियुक्ति को लेकर बढ़ी यह सियासी खींचतान भाजपा संगठन के लिए नई चुनौती बनती दिखाई दे रही है।











