मोहन सरकार में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह विवादों में घिर गए हैं। उन पर जबलपुर स्मार्ट सिटी के सीईओ IAS अरविंद शाह को अपने बंगले पर तलब कर अपमानित करने, गालियां देने और जान से मारने की धमकी देने का गंभीर आरोप लगा है।
IAS Arvind Shah ने आरोप लगाया है कि मंत्री ने उन्हें पूरी सिख कौम से तलवार लेकर खत्म कर देने की धमकी दी। इस घटना के बाद से अधिकारी गहरे सदमे में हैं और डिप्रेशन में चले गए हैं। उन्होंने इस मामले की पूरी जानकारी मुख्य सचिव अनुराग जैन और मध्य प्रदेश आईएएस एसोसिएशन को दी है।
यह पूरा मामला 17 मार्च 2026 को शुरू हुआ, जब IAS अरविंद शाह ने जबलपुर नगर निगम में एडिशनल कमिश्नर के साथ जबलपुर स्मार्ट सिटी का प्रभार संभाला। पदभार संभालते ही, उन्होंने कामकाज में सुधार के संकेत दिए और कर्मचारियों की बैठक बुलाई। मार्च माह के वेतन वितरण के दौरान, उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर स्मार्ट सिटी के कर्मचारियों के उपस्थिति रिकॉर्ड की जांच करवाई। इस जांच में छह कर्मचारी ऐसे पाए गए, जिनकी अनुपस्थिति का कोई ठोस कारण नहीं था। इनमें से कुछ तो बिना सूचना दिए ही अनुपस्थित थे। नियमों के अनुसार, इन कर्मचारियों का वेतन स्पष्टीकरण मिलने तक रोक दिया गया।
दिलप्रीत कौर बनी विवाद की वजह
वेतन रोके गए कर्मचारियों में एक नाम दिलप्रीत कौर भल्ला का था। रिकॉर्ड के मुताबिक, वे न तो किसी बैठक में शामिल हुई थीं और न ही उन्होंने अपनी अनुपस्थिति का कोई कारण बताया था। 21 अप्रैल को आयुक्त ने निर्देश दिए कि दिलप्रीत कौर का वेतन सशर्त जारी किया जाए, उन्हें काम सौंपा जाए और उनकी उपस्थिति पर विशेष नजर रखी जाए।
अगले ही दिन, 22 अप्रैल को IAS अरविंद शाह ने दिलप्रीत कौर को सहायक अभियंता कविता मिश्रा की मौजूदगी में कार्यालय में बुलाया। यह उनकी पहली मुलाकात थी। बातचीत के दौरान, जब अरविंद शाह ने पूछा कि वे कब से सीईओ के रूप में कार्यरत हैं, तो दिलप्रीत ने जवाब दिया कि करीब 3-4 महीने से।
जबकि हकीकत यह थी कि शाह को इस पद पर आए सिर्फ एक महीना ही हुआ था। इस बात से यह स्पष्ट हो गया कि दिलप्रीत नियमित रूप से कार्यालय नहीं आ रही थीं। दिलप्रीत के जाने के बाद, IAS शाह अपने नियमित कामकाज में लग गए, तभी अचानक उनके पास एक फोन आया, जिसने 22 अप्रैल के दिन को उनके करियर का सबसे खराब दिन बना दिया।
अपमान का आधा घंटा
22 अप्रैल को ही कुछ घंटों बाद, घटनाक्रम ने एक खतरनाक मोड़ ले लिया। IAS अरविंद शाह को अचानक मंत्री राकेश सिंह के बंगले पर बुलाया गया। मंत्री कथित तौर पर बेहद गुस्से में थे। हालात को भांपते हुए, नगर निगम कमिश्नर राम अहिरवार ने अरविंद शाह को फोन पर सलाह दी कि वे किसी भी तरह स्थिति को शांत करें और बिना शर्त माफी मांग लें। सम्मान स्वरूप गुलदस्ता लेकर अरविंद शाह मंत्री आवास पहुंचे, जहां नगर निगम आयुक्त पहले से मौजूद थे। मंत्री राकेश सिंह कर्मचारी दिलप्रीत के मामले को लेकर आग बबूला हो रहे थे।
जैसे ही मंत्री को पता चला कि सामने खड़े अधिकारी स्मार्ट सिटी के सीईओ हैं, उन्होंने गुलदस्ता लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद जो हुआ, वह प्रशासनिक मर्यादाओं को तार-तार कर देने वाला है। IAS अरविंद शाह के मुताबिक, मंत्री ने करीब 30 मिनट तक उन्हें लगातार अपमानित किया। व्यक्तिगत स्तर पर गालियां दीं, मां तक की अपशब्द कहे और जान से मारने की धमकी दी। मंत्री ने कथित तौर पर कहा कि एक इशारे पर पूरी सिख कौम तलवार लेकर उनके पीछे पड़ जाएगी और उन्हें मार देगी। मंत्री ने शाह के IAS चयन पर भी सवाल उठाए और यहां तक कह दिया कि उन्हें सजा दिलाने के लिए मुख्यमंत्री से बात कर ली गई है, और उन्हें सिंगरौली (शाह का गृह नगर) तक पैदल कराकर भेजा जाएगा।
स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई थी कि IAS अरविंद शाह ने मंत्री, संबंधित महिला कर्मचारी और उसके पिता तीनों से कम से कम तीन-तीन बार बिना किसी शर्त के माफी मांगी। नगर निगम आयुक्त राम अहिरवार ने बीच-बचाव करते हुए मंत्री को समझाने की कोशिश की कि शाह एक पेशेवर अधिकारी हैं और किसी महिला या जनप्रतिनिधि का अपमान नहीं कर सकते, लेकिन मंत्री का गुस्सा शांत नहीं हुआ। हालात बिगड़ते देख जबलपुर कलेक्टर आईएएस राघवेंद्र सिंह भी मौके पर पहुंचे और स्थिति संभालने की कोशिश की। आरोप है कि मंत्री ने उनकी भी नहीं सुनी और पूरा घटनाक्रम उसी आक्रामक अंदाज में चलता रहा, जिससे आईएएस अरविंद शाह बुरी तरह सहम गए।
IAS एसोसिएशन सीएम से करेगा मुलाकात
अपने साथ हुए इस घटनाक्रम की जानकारी IAS अरविंद शाह ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ मध्य प्रदेश आईएएस एसोसिएशन को भी दे दी है। एसोसिएशन के अध्यक्ष मनु श्रीवास्तव का कहना है कि अरविंद शाह ने परिवार समेत उनसे मिलकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी है। उन्होंने यह भी बताया कि एसोसिएशन ने मुख्य सचिव अनुराग जैन को भी इस मामले से अवगत करा दिया है। जल्द ही एसोसिएशन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात कर अपना पक्ष रखेगा। वहीं, आईएएस अरविंद शाह ने कहा कि उन्होंने पूरे घटनाक्रम की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी है और उन्हें इस मामले में और कुछ नहीं कहना है।
दूसरा पक्ष और उनके दावे
इस मामले में एक दूसरा पक्ष भी सामने आया है, जिसका तर्क है कि आईएएस अरविंद शाह ने महिला कर्मचारी दिलप्रीत से दुर्व्यवहार किया था। मामले को लेकर जबलपुर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान रजिंदर सिंह छाबड़ा की अध्यक्षता में गोरखपुर गुरुद्वारे में बैठक हुई, जिसमें पदाधिकारियों ने अधिकारी की कार्यशैली और आचरण की निंदा की।
स्थानीय स्तर पर यह नैरेटिव चलाया जा रहा है कि जैसे ही विवाद बढ़ने की खबर मंत्री राकेश सिंह तक पहुंची, उन्होंने मोर्चा संभाला और कमिश्नर, कलेक्टर व एसपी के साथ उच्चस्तरीय बैठक बुलाई। दावा किया गया कि मंत्री के सामने आईएएस अरविंद शाह को पेश किया गया, जहां उन्होंने लिखित रूप से माफी मांगी है।
हालांकि, हकीकत यह है कि जब यह घटनाक्रम चल रहा था, तब वहां सिर्फ नगर निगम कमिश्नर और अरविंद शाह मौजूद थे। कलेक्टर आधे घंटे बाद मौके पर पहुंचे थे, जबकि एसपी वहां नहीं पहुंचे थे। दूसरे पक्ष द्वारा यह भी दावा किया जा रहा है कि मंत्री राकेश सिंह के हस्तक्षेप के बाद आईएएस अरविंद शाह ने लिखित में माफीनामा दिया है, जबकि यह भी हकीकत नहीं है। कहा जा रहा है कि उन्होंने न तो लिखित में माफी मांगी है और न ही सार्वजनिक रूप से।
कौन हैं IAS अरविंद शाह?
IAS अरविंद शाह 2021 बैच के मध्य प्रदेश कैडर के अधिकारी हैं। वे मूल रूप से सिंगरौली के रहने वाले हैं। उन्होंने भोपाल के मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MANIT) से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर की थी, जिसके बाद वे प्रशासनिक सेवा में आए। सेवा के दौरान वे शिवपुरी और सीहोर में अलग-अलग पदों पर काम कर चुके हैं। वर्तमान में वे जबलपुर नगर निगम में अपर आयुक्त और साथ ही स्मार्ट सिटी लिमिटेड के CEO की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।











