भीमताल की पहाड़ियों में फैली ठंडी हवा और मधुमक्खियों की हल्की गुनगुनाहट — इन्हीं के बीच पंकज पांडे अपने परिवार द्वारा चलाए जा रहे मधुमक्खी पालन केंद्र के छत्तों से शहद से भरा लकड़ी का फ्रेम सावधानी से उठाते हैं। कुछ साल पहले तक उनके इस मधुमक्खी पालन के छोटे से काम द्वारा घर का खर्च चलाना भी काफी मुश्किल था।
लेकिन कुमाऊँ विश्वविद्यालय के एमबीए छात्र पंकज के जीवन में एक नया मोड़ तब आया, जब उन्होंने देवभूमि उद्यमिता योजना (डीयूवाई) के तहत आयोजित दो-दिवसीय बूट कैंप में हिस्सा लिया। यह योजना उत्तराखंड सरकार के उच्च शिक्षा विभाग की पहल है, जिसे भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान (EDII), अहमदाबाद द्वारा लागू किया गया है।
इस प्रशिक्षण शिविर ने पंकज के भीतर एक नई सोच जगाई — कि पारिवारीक पारंपरिक शहद उत्पादन व्यवसाय एक आधुनिक और ब्रांडेड उद्यम बन सकता है। मेंटर्स के मार्गदर्शन में उन्होंने अपना बिज़नेस मॉडल कैनवस तैयार किया। उनकी लगन और दृष्टि को देखते हुए, डीयूवाई के मेंटर्स ने उन्हें 12-दिवसीय उद्यमिता विकास कार्यक्रम (EDP) के लिए चुना, जहाँ पंकज ने अपने व्यावसायिक विचारों को और निखारा और आगे बढने की ठोस दिशा पाई।
पंकज ने अपने सपने को हक़ीक़त में बदल दिया। उन्होंने ‘पर्व हनी (Parv Honey)’ नाम से अपना ब्रांड लॉन्च किया — जो शुद्धता और भरोसे पर आधारित है। उन्हें देवभूमि उद्यमिता योजना (डीयूवाई) के तहत ₹75,000 की प्रारंभिक वित्तीय सहायता (सीड फंडिंग) प्राप्त हुई। सिर्फ एक वर्ष के भीतर, पंकज ने ₹5,00,000 का रेवेन्यू)अर्जित कर लिया — जो उनके मेहनत, नवाचार और मार्गदर्शन के सही संगम का परिणाम था। अब उनका लक्ष्य ‘पर्व हनी’ को एक बेहतरीन, विश्वसनीय और क्षेत्रीय पहचान वाला ब्रांड बनाना है और वर्ष 2028 तक इसे ₹25 लाख के कारोबार तक पहुँचाना है।
इसी तरह, उत्तराखंड के जंगलों में लगने वाली आग से होने वाले नुकसान को देखते हुए, ज़ैनब सिद्दीकी ने एक नया समाधान खोजने का निश्चय किया। सरकारी पीजी कॉलेज, न्यू टिहरी से वनस्पति विज्ञान में स्नातकोत्तर ज़ैनब ने ‘इको नेक्सस इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड’ की स्थापना की — जो सूखी चीड़ की पत्तियों से कम्पोज़िट बोर्ड बनाती है।
डीयूवाई के प्रशिक्षण ने ज़ैनब को अपने विचार को ओर सशक्त और व्यवहारिक रूप देने में मदद की। इससे उन्होंने पेटेंट और ट्रेडमार्क दर्ज कराया और वित्तीय सहयोग भी प्राप्त किया —उत्तराखंड सरकार से ₹75,000, हीरो मोटोकॉर्प के सीएसआर फंड से ₹1,00,000, और आईआईएम काशीपुर से ₹5,00,000 का समर्थन मिला।













