साल 1985 की दीपावली पर रिलीज हुई फिल्म ‘मर्द’ ने न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़े, बल्कि अपने समय की बहुप्रचारित फिल्मों में से एक बन गई। मनमोहन देसाई द्वारा निर्देशित इस फिल्म में अमिताभ बच्चन ने मुख्य भूमिका निभाई थी। फिल्म के निर्माता-निर्देशक को लेकर फिल्म इंडस्ट्री के एक वर्ग में आशंका थी कि यह फिल्म फ्लॉप साबित होगी, लेकिन रिलीज के बाद ‘मर्द’ ब्लॉकबस्टर साबित हुई।
1980 के दशक की शुरुआत में अमिताभ बच्चन का स्टारडम शिखर पर था। 1982 में ‘नमक हलाल’, ‘बेमिसाल’, ‘सत्ते पे सत्ता’, ‘शक्ति’ और ‘खुद्दार’ जैसी सफल फिल्में देने के बाद, 8 अक्टूबर 1983 को ‘मर्द’ का मुहूर्त हुआ। फिल्म की रिलीज 8 नवंबर 1985 को दीपावली पर हुई।
फिल्म की कहानी और निर्माण
‘मर्द’ एक्शन, ड्रामा और रोमांस से भरपूर फिल्म थी, जिसमें अमिताभ बच्चन के साथ अमृता सिंह, दारा सिंह, निरुपा रॉय, प्रेम चोपड़ा, बॉब क्रिस्टो और सत्येन कप्पू जैसे कलाकार नजर आए। फिल्म की पटकथा प्रयागराज और पुष्पराज शर्मा ने लिखी, जबकि स्क्रीनप्ले केके शुक्ला ने तैयार किया। संवाद इंदर राज आनंद ने लिखे। संगीत अनु मलिक ने दिया, जिनके करियर के लिए यह फिल्म मील का पत्थर साबित हुई।
यह पहली बार था जब मनमोहन देसाई ने अमिताभ बच्चन के साथ सोलो फिल्म बनाई। इससे पहले वे मल्टी-स्टारर मसाला फिल्में बनाते रहे थे। ‘मर्द’ की शूटिंग बेंगलुरु, मैसूर और ऊटी में हुई। फिल्म का एक चर्चित सीन, जिसमें शीशे का इस्तेमाल हुआ था, 1960 की फिल्म ‘कोहिनूर’ से प्रेरित था, जबकि कोहिनूर का वह दृश्य 1933 की अमेरिकी फिल्म ‘डक सूप’ से लिया गया था।
फिल्म से जुड़े रोचक तथ्य
फिल्म के एक गाने ‘हम तो तंबू में बंबू लगाए बैठे’ को अश्लील मानते हुए कई डिस्ट्रीब्यूटर्स ने इसे हटाने की मांग की, लेकिन मनमोहन देसाई ने इसे लोक गीत बताते हुए मना कर दिया। फिल्म में ‘ब्राउनी’ नामक डॉग भी आकर्षण का केंद्र था, जिसके मालिक को 50 हजार रुपये दिए गए थे। निरुपा रॉय ने फिल्म में अमिताभ बच्चन की मां की भूमिका निभाई थी। इससे पहले वे ‘अमर अकबर एंथनी’, ‘सुहाग’, ‘गंगा जमुना सरस्वती’ और ‘दीवार’ में भी उनकी मां का किरदार निभा चुकी थीं।
फिल्म की शूटिंग करीब दो साल चली। इसकी वजह अमिताभ बच्चन की मायस्थेनिया ग्रेविस बीमारी थी, जिससे वे उस दौरान जूझ रहे थे। फिल्म का प्रीमियर 6 नवंबर 1985 को हुआ, लेकिन इसी दिन संजीव कुमार के निधन की खबर आई, जिसके कारण प्रीमियर रोकना पड़ा। मनमोहन देसाई और अमिताभ बच्चन, संजीव कुमार के अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। बाद में फिल्म की स्क्रीनिंग पूरी की गई।
संगीतकार अनु मलिक का सफर
फिल्म के संगीतकार अनु मलिक को यह मौका इसलिए मिला क्योंकि लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के साथ मीटिंग रद्द हो गई थी। इस कारण मनमोहन देसाई ने अनु मलिक को साइन किया। फिल्म के गीत और संगीत ने भी दर्शकों को खूब आकर्षित किया।
आर्थिक सफलता
2.8 करोड़ के बजट में बनी ‘मर्द’ ने वर्ल्डवाइड 16 करोड़ रुपये की कमाई की। फिल्म ने अपने समय में कई रिकॉर्ड बनाए और ब्लॉकबस्टर के तौर पर याद की जाती है। ‘मर्द’ की रिलीज और सफलता ने न सिर्फ अमिताभ बच्चन के करियर को नई ऊंचाई दी, बल्कि 1980 के दशक के हिंदी सिनेमा की मसाला फिल्मों का भी प्रभावशाली उदाहरण पेश किया।











