इंदौर अग्निकांड अपडेट: EV नहीं, बिजली पोल की स्पार्किंग बनी आग की वजह, मदद मांगने पर फायर ब्रिगेड ने काटा था कॉल

Author Picture
By Pinal PatidarPublished On: March 20, 2026

मध्यप्रदेश के इंदौर में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और संवेदनहीनता की भयावह तस्वीर बनकर सामने आया है। स्वर्ण बाग कॉलोनी में तीन मंजिला मकान में लगी आग ने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया और आठ लोगों की जान चली गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय पर मदद पहुंचती तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती थीं, लेकिन सिस्टम की सुस्ती और अव्यवस्था ने सब कुछ खत्म कर दिया।

मदद की गुहार और फायर ब्रिगेड की अनदेखी

घटना के दौरान लोगों ने लगातार फायर ब्रिगेड को फोन कर मदद मांगी, लेकिन वहां से कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं मिली। वायरल ऑडियो क्लिप में साफ सुनाई देता है कि एक व्यक्ति घबराते हुए धमाकों की आवाज सुनाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसकी बात पूरी होने से पहले ही कॉल काट दी जाती है। यह लापरवाही उस वक्त और भी गंभीर हो जाती है जब प्रत्यक्षदर्शी बताते हैं कि उन्हें 15 मिनट में पहुंचने का आश्वासन दिया गया था, जो बाद में डेढ़ घंटे की देरी में बदल गया।

आग की भयावहता और बेबस लोग

आग इतनी तेजी से फैली कि आसपास के लोग चाहकर भी मदद नहीं कर पाए। घर के पास बिजली के तार और ट्रांसफॉर्मर होने के कारण करंट फैलने का डर बना रहा। लोग चीखते-चिल्लाते रहे, लेकिन किसी ने जान जोखिम में डालने की हिम्मत नहीं जुटाई। हर कोई बस फायर ब्रिगेड का इंतजार करता रहा, जो समय पर नहीं पहुंची। इस बीच मकान के अंदर से लगातार धमाकों की आवाजें आती रहीं और आग ने पूरे घर को अपनी चपेट में ले लिया।

आग लगने की वजह पर विवाद

शुरुआत में इस हादसे की वजह ईवी कार की चार्जिंग में शॉर्ट सर्किट बताई गई, लेकिन पीड़ित परिवार ने इस दावे को खारिज कर दिया। मृतक मनोज पुगलिया के बेटे के अनुसार, आग पास के बिजली के खंभे में स्पार्किंग से शुरू हुई थी। पहले एक कार में आग लगी, फिर पास खड़ी बाइक और उसके बाद पूरा घर इसकी चपेट में आ गया। इस बयान ने हादसे के कारणों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

फायर ब्रिगेड की देरी और अधूरी तैयारी

सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि जब फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। आरोप है कि उनके टैंकर खाली थे, उन्हें गली का सही रास्ता नहीं पता था और उनके पास ऊंची इमारतों में बचाव के लिए जरूरी उपकरण भी नहीं थे। पीड़ित परिवार का कहना है कि जब उन्होंने मदद की गुहार लगाई तो एक फायरकर्मी ने उल्टा उन्हें ही आग बुझाने की बात कह दी, जो संवेदनहीनता की हद को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री के सामने भी उठे सवाल

घटना के बाद मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव जब पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे, तब परिजनों ने उनके सामने फायर ब्रिगेड की देरी और खराब व्यवहार की शिकायत की। उन्होंने साफ कहा कि अगर समय पर मदद मिलती तो उनके अपने आज जिंदा होते। यह बयान न सिर्फ दुखद है, बल्कि सिस्टम पर गंभीर सवाल भी खड़े करता है।

वायरल ऑडियो-वीडियो ने खोली सच्चाई

इस पूरे मामले में वायरल हो रहे ऑडियो और वीडियो क्लिप सबसे बड़ा सबूत बनकर सामने आए हैं। वीडियो में आग की भयावह लपटें, धमाकों की आवाजें और लोगों की बेबसी साफ दिखाई देती है। वहीं ऑडियो क्लिप में फायर ब्रिगेड की अनदेखी और लापरवाही उजागर होती है, जिसने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

एक स्टेटस जो बन गया आखिरी संदेश

इस दर्दनाक हादसे में जान गंवाने वाले मनोज पुगलिया का आखिरी व्हाट्सएप स्टेटस अब लोगों की आंखें नम कर रहा है। उन्होंने लिखा था— “वक्त सब कुछ छीन सकता है।” यह लाइन अब उनके परिवार के लिए एक कड़वी सच्चाई बन गई है। उनके स्टेटस में भगवान के प्रति आस्था भी झलकती थी, लेकिन शायद किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।

सिस्टम की नाकामी या हादसा?

इंदौर का यह अग्निकांड अब सिर्फ एक हादसा नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे सिस्टम की बड़ी विफलता के रूप में देखा जा रहा है। सवाल यह है कि क्या समय पर कार्रवाई होती तो आठ जिंदगियां बच सकती थीं? क्या फायर ब्रिगेड की तैयारी पर्याप्त थी? और सबसे बड़ा सवाल—क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सकेगा या फिर लापरवाही का यह सिलसिला यूं ही जारी रहेगा?