इंदौर-उज्जैन सिक्सलेन में इस्तेमाल हो रहे जीएफआरपी के सरिये, वायरल वीडियो निकला भ्रामक

Author Picture
By Raj RathorePublished On: March 17, 2026
Indore Ujjain Highway

निर्माणाधीन इंदौर-उज्जैन सिक्सलेन को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने सड़क की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। वीडियो में दावा किया गया कि सड़क के ड्रेनेज निर्माण में मजबूती के लिए लोहे की जगह “प्लास्टिक के सरियों” का इस्तेमाल हो रहा है। यह जानकारी पूरी तरह भ्रामक और गलत है। मामले के तूल पकड़ने के बाद विभागीय अधिकारियों और विशेषज्ञों ने मौके का मुआयना कर स्थिति स्पष्ट की।

अधिकारियों ने बताया कि निर्माण में प्लास्टिक नहीं, बल्कि ग्लास फाइबर रीइनफोर्स्ड पॉलिमर (GFRP) से बने आधुनिक सरियों का उपयोग किया जा रहा है। यह एक उन्नत निर्माण तकनीक है, जो पारंपरिक स्टील के सरियों की तुलना में कई मामलों में बेहतर मानी जाती है। यह पूरी तरह से निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप है।

स्टील से ज्यादा मजबूत और टिकाऊ है GFRP

विशेषज्ञों के अनुसार, GFRP सरिये पारंपरिक लोहे के सरियों का एक आधुनिक विकल्प हैं। इन्हें कांच के फाइबर और पॉलिमर रेजिन से तैयार किया जाता है, जिसके कारण इन्हें फाइबर सरिया भी कहा जाता है। ये स्टील की तुलना में ज्यादा मजबूत, हल्के और टिकाऊ होते हैं। सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये जंग-रोधी (rust-proof) होते हैं, जिससे निर्माण की उम्र बढ़ जाती है।

क्या है ग्लास फाइबर रीइनफोर्स्ड पॉलिमर ?

GFRP एक कंपोजिट मटेरियल है जो अपनी मजबूती और हल्केपन के लिए जाना जाता है। इसमें बिजली या चुंबकीय क्षेत्र का प्रवाह नहीं होता, जो इसे कई विशेष परियोजनाओं के लिए आदर्श बनाता है। इसका इस्तेमाल दुनिया भर में पुल, फ्लाईओवर, समुद्री किनारों के निर्माण, पानी की टंकियों, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और मेट्रो परियोजनाओं में तेजी से बढ़ रहा है।

मानकों पर खरी है यह तकनीक

सड़क निर्माण के लिए मानक तय करने वाली संस्था इंडियन रोड्स कांग्रेस (IRC) ने भी अपनी गाइडलाइन्स में GFRP के इस्तेमाल को प्रमाणित और सुरक्षित माना है। कोड 137: 2022 के तहत सड़क परियोजनाओं में इन सरियों का उपयोग पूरी तरह अनुशंसित है। अधिकारियों का कहना है कि यह एक नई और सुरक्षित तकनीक है, जिसके इस्तेमाल से निर्माण की गुणवत्ता पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता, बल्कि मजबूती और बढ़ जाती है।