मध्यप्रदेश के इंदौर में ओला, उबर और रेपिडो जैसी बाइक टैक्सी सेवाओं की कार्यप्रणाली अब कानूनी जांच के दायरे में आ गई है। यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठने के बाद इंदौर स्थित मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने बिना परमिट दोपहिया वाहनों से यात्री ढोने और सुरक्षा नियमों की अनदेखी पर नाराजगी जताते हुए केंद्र और राज्य सरकार के साथ-साथ संबंधित कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। अदालत ने सभी पक्षों से चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब मांगा है।
मोटर व्हीकल एक्ट के उल्लंघन पर कोर्ट ने उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि शहर में संचालित हो रही बाइक टैक्सी सेवाओं में मोटर व्हीकल एक्ट के नियमों का खुला उल्लंघन किया जा रहा है। कोर्ट ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश के प्रमुख सचिव गृह विभाग और ओला, उबर व रेपिडो जैसी कंपनियों से जवाब मांगा है। अदालत ने यह भी पूछा कि व्यावसायिक उपयोग में लगाए गए इन दोपहिया वाहनों में यात्रियों की सुरक्षा के लिए क्या प्रावधान किए गए हैं और इनमें जीपीएस सिस्टम क्यों नहीं लगाया गया है।
कानून के छात्र की जनहित याचिका से उठा मामला
यह पूरा मामला एक जनहित याचिका से सामने आया है, जिसे कानून के छात्र आयुष जाट ने दायर किया है। एडवोकेट अमित सिंह सिसोदिया के माध्यम से दाखिल इस याचिका में कहा गया है कि शहर में बाइक टैक्सी के रूप में चल रहे अधिकांश दोपहिया वाहन वास्तव में निजी उपयोग के लिए पंजीकृत हैं। ऐसे में यदि किसी दुर्घटना की स्थिति बनती है तो यात्री बीमा का दावा नहीं कर पाता और न ही किसी जिम्मेदार संस्था से जवाबदेही तय हो पाती है।
जीपीएस और वैध दस्तावेजों को लेकर भी उठे सवाल
याचिका में यह भी कहा गया है कि इन बाइक टैक्सी वाहनों में जीपीएस सिस्टम नहीं होने के कारण उनकी लाइव लोकेशन ट्रैक नहीं की जा सकती। इससे यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा बना रहता है। इसके अलावा चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस है या नहीं, वाहन का पंजीकरण और परमिट वैध है या नहीं, इसकी भी उचित जांच नहीं होती। इन सभी मुद्दों को लेकर अदालत ने संबंधित पक्षों से स्पष्ट जवाब देने को कहा है।
पहले भी जारी हो चुका है कोर्ट का आदेश
गौरतलब है कि अक्टूबर 2025 में भी हाईकोर्ट की युगलपीठ राज्य सरकार को मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 66 का सख्ती से पालन कराने का निर्देश दे चुकी है। हालांकि याचिका में कहा गया है कि अब तक उस आदेश का जमीन पर कोई ठोस असर दिखाई नहीं दिया और यह केवल कागजों तक सीमित रह गया है।
व्यावसायिक वाहनों के लिए अलग पहचान की मांग
याचिका में यह मांग भी उठाई गई है कि व्यावसायिक रूप से यात्रियों को सेवा देने वाले दोपहिया वाहनों के लिए स्पष्ट नियम बनाए जाएं। ऐसे वाहनों पर चालक का लाइसेंस, वाहन पंजीकरण, परमिट और बीमा की जानकारी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित की जाए। साथ ही, व्यावसायिक उपयोग वाले वाहनों की नंबर प्लेट सामान्य निजी वाहनों से अलग हो, ताकि उन्हें आसानी से पहचाना जा सके और नियमों का पालन सुनिश्चित हो सके।










