पं. गोविंद बल्लभ पंत की दूरदर्शी सोच से ही विकास की राह पर आगे बढ़ रहा यूपी, सीएम योगी आदित्यनाथ

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By Raj RathorePublished On: March 7, 2026

लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पंडित गोविंद बल्लभ पंत को याद करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश आज जो कुछ भी करने में सक्षम है, उसके पीछे पंत जी की विचारधारा और दूरदर्शिता है। सीएम योगी ने पंत जी को स्वतंत्रता संग्राम के महानायक और उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री के रूप में श्रद्धांजलि दी।

पंडित पंत की विरासत पर सीएम योगी के विचार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पंडित गोविंद बल्लभ पंत ने उत्तर प्रदेश की नींव मजबूत की। उन्होंने राज्य के विकास की जो रूपरेखा तैयार की, वह आज भी प्रासंगिक है। सीएम योगी ने कहा कि पंत जी ने शिक्षा, समाज सुधार और प्रशासनिक व्यवस्था में अहम बदलाव किए।

“उत्तर प्रदेश आज जो कुछ भी करने में सक्षम है, उसके पीछे पंडित गोविंद बल्लभ पंत की सोच है।” — सीएम योगी आदित्यनाथ

स्वतंत्रता संग्राम में पंत जी का योगदान

पंडित गोविंद बल्लभ पंत ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाई थी। वे उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री बने। बाद में उन्होंने केंद्र में गृहमंत्री के रूप में भी सेवा दी। उन्हें 1957 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।

यूपी के विकास में पंत जी की भूमिका

सीएम योगी ने रेखांकित किया कि पंत जी ने उत्तर प्रदेश में जमींदारी उन्मूलन जैसे ऐतिहासिक कदम उठाए। इससे लाखों किसानों को जमीन का अधिकार मिला। उन्होंने हिंदी को राजभाषा बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पंत जी की नीतियों ने राज्य में सामाजिक न्याय की नींव रखी।

वर्तमान सरकार का संकल्प

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि वर्तमान सरकार पंत जी के सपनों को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश आज देश की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। कानून-व्यवस्था, बुनियादी ढांचा और औद्योगिक विकास में राज्य ने उल्लेखनीय प्रगति की है।

सीएम योगी ने कहा कि पंत जी की विरासत को संजोकर रखना हर उत्तर प्रदेशवासी का कर्तव्य है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे पंत जी के जीवन से प्रेरणा लें और राज्य के विकास में योगदान दें।

उल्लेखनीय है कि पंडित गोविंद बल्लभ पंत का जन्म 10 सितंबर 1887 को उत्तराखंड के अल्मोड़ा में हुआ था। उन्होंने अपना पूरा जीवन राष्ट्र सेवा में समर्पित किया। 7 मार्च 1961 को उनका निधन हुआ था।