आम आदमी को बड़ा झटका, घरेलू और कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम बढ़े, जानें कितने रुपये बढ़ी कीमत

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By Raj RathorePublished On: March 7, 2026

देश में रसोई गैस की कीमतों में एक साथ दो बड़े बदलाव लागू किए गए हैं। 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलेंडर के दाम 60 रुपये बढ़ाए गए हैं। इसके साथ 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में करीब 115 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। नई दरें 7 मार्च 2026 से पूरे देश में लागू हो चुकी हैं। इस फैसले का असर घरेलू बजट के साथ सेवा और खाद्य कारोबार की लागत पर भी पड़ेगा।

घरेलू सिलेंडर की नई कीमतों में चार बड़े महानगरों में समान वृद्धि दिखी है। दिल्ली में 14.2 किलो सिलेंडर 853 रुपये से बढ़कर 913 रुपये हो गया है। मुंबई में यह 852.50 रुपये से 912.50 रुपये पहुंचा है। कोलकाता में कीमत 879 रुपये से बढ़कर लगभग 939 रुपये हो गई है। चेन्नई में दर 868.50 रुपये से बढ़कर 928.50 रुपये दर्ज की गई है।

कमर्शियल श्रेणी में भी बढ़ोतरी समान पैटर्न पर लागू हुई है। दिल्ली में 19 किलो सिलेंडर की कीमत 1768.50 रुपये से बढ़कर 1883 रुपये हो गई। मुंबई में यह 1720.50 रुपये से 1835 रुपये पहुंची। कोलकाता में दर 1875.50 रुपये से बढ़कर 1990 रुपये हुई। चेन्नई में कमर्शियल सिलेंडर 1929 रुपये से बढ़कर 2043.50 रुपये हो गया। यह वृद्धि होटल, रेस्टोरेंट और छोटे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खर्च को सीधे प्रभावित कर सकती है।

करीब एक साल बाद घरेलू LPG दरों में बदलाव

घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में पिछला संशोधन अप्रैल 2025 में हुआ था। उस समय दिल्ली में गैर-सब्सिडी घरेलू सिलेंडर का दाम 853 रुपये तय किया गया था। इसके बाद लगभग एक साल तक कीमतें स्थिर रहीं। अब मार्च 2026 में लागू नई बढ़ोतरी को हालिया अवधि का पहला बड़ा संशोधन माना जा रहा है। यह पृष्ठभूमि इसलिए अहम है क्योंकि उपभोक्ता और कारोबार दोनों लंबे समय से स्थिर दरों के बाद नई लागत का सामना कर रहे हैं।

सरकार ने ऊर्जा उपलब्धता पर दिया आश्वासन

केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने ईंधन उपलब्धता को लेकर स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि देश में ऊर्जा की कमी नहीं है। सरकार ने उपभोक्ताओं से घबराहट में प्रतिक्रिया न देने को भी कहा है।

“देश में ऊर्जा की कोई कमी नहीं है और उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार की प्राथमिकता नागरिकों को किफायती और टिकाऊ ईंधन उपलब्ध कराना है।” — हरदीप सिंह पुरी

इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने भी पेट्रोल और डीजल की कमी संबंधी सोशल मीडिया दावों को गलत बताया है। कंपनी ने कहा कि देश में ईंधन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। सप्लाई और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क सामान्य रूप से काम कर रहे हैं। कंपनी ने लोगों से अपील की कि वे अफवाहों पर नहीं, आधिकारिक सूचना पर भरोसा करें।

होर्मुज स्थिति पर नजर, LPG उत्पादन बढ़ाने के निर्देश

कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति को लेकर सरकार ने कहा है कि भारत फिलहाल सुरक्षित स्थिति में है। ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद किए जाने के बाद वैश्विक आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। इसके बीच भारतीय अधिकारियों का कहना है कि घरेलू जरूरतों के लिए पर्याप्त भंडार मौजूद है। इसी संदर्भ में सभी LPG रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि उपलब्धता पर दबाव न बने।

अधिकारियों के मुताबिक वर्तमान स्टॉक स्तर सामान्य मांग को संभालने के लिए पर्याप्त है। इसलिए उपभोक्ताओं को गैस उपलब्धता को लेकर अनावश्यक खरीद या चिंता की जरूरत नहीं है। सरकार की रणनीति आपूर्ति निरंतर बनाए रखने और लॉजिस्टिक चैन को स्थिर रखने पर केंद्रित है।

आयात स्रोतों में बदलाव: रूस से हिस्सेदारी बढ़ी, अमेरिका से LPG आपूर्ति शुरू

भारत ने पिछले कुछ वर्षों में कच्चे तेल के आयात स्रोतों में विविधता बढ़ाई है। 2022 में रूस से आयात का हिस्सा केवल 0.2 प्रतिशत था। बाद के वर्षों में इसमें तेज वृद्धि हुई। फरवरी के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार भारत ने कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 20 प्रतिशत रूस से खरीदा, जो करीब 1.04 मिलियन बैरल प्रतिदिन के बराबर है।

LPG आपूर्ति के मोर्चे पर भी नया स्रोत जोड़ा गया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार जनवरी 2026 से अमेरिका से LPG आयात शुरू हुआ है। सार्वजनिक क्षेत्र की भारतीय तेल कंपनियों ने नवंबर 2025 में अमेरिकी गल्फ कोस्ट से लगभग 2.2 मिलियन टन प्रति वर्ष LPG आयात के लिए एक साल का अनुबंध किया था। इस समझौते के तहत 2026 में आपूर्ति जारी रहने की योजना है।

कुल मिलाकर, 7 मार्च से लागू नई LPG दरें घरेलू उपभोक्ताओं और व्यावसायिक इकाइयों दोनों की लागत बढ़ाएंगी। समानांतर रूप से सरकार और तेल कंपनियां आपूर्ति तंत्र स्थिर रखने, भंडार बनाए रखने और आयात स्रोतों को विविध बनाने पर काम कर रही हैं, ताकि कीमतों में बदलाव के बीच उपलब्धता प्रभावित न हो।