एमपी में 2700 रुपये पार हो सकता है गेहूं का भाव, सरकार को दिया गया अहम प्रस्ताव

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By Pinal PatidarPublished On: March 3, 2026
Gehun Mandi Bhav

मध्यप्रदेश में एक ओर रबी सीजन की गेहूं खरीदी को लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेज हैं, तो दूसरी ओर समर्थन मूल्य और बोनस को लेकर किसानों में असंतोष दिखाई दे रहा है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2024-25 के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2585 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है। इसके बावजूद प्रदेश के किसान खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं, क्योंकि राज्य सरकार की ओर से मिलने वाला बोनस इस बार बेहद कम कर दिया गया है।

बोनस में कटौती पर सियासत गरम

पिछले वर्ष राज्य सरकार ने एमएसपी पर गेहूं बेचने वाले किसानों को 175 रुपये प्रति क्विंटल का अतिरिक्त बोनस दिया था, लेकिन इस बार महज 15 रुपये प्रति क्विंटल बोनस घोषित किया गया है। इस बड़े अंतर को लेकर विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस का कहना है कि महंगाई और लागत बढ़ने के बावजूद किसानों को अपेक्षित राहत नहीं दी जा रही।

जीतू पटवारी का सरकार पर हमला

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोमवार को मीडिया से बातचीत करते हुए राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब पड़ोसी राज्य राजस्थान की सरकार गेहूं पर 150 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस दे रही है, तो मध्यप्रदेश के किसानों को सिर्फ 15 रुपये ही क्यों? पटवारी ने सरकार से आग्रह किया कि पिछले वर्ष की तरह 175 रुपये का बोनस दिया जाए, जिससे किसानों को 2700 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक का भाव मिल सके।

मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, बढ़े बोनस की मांग

जीतू पटवारी ने बोनस राशि को लेकर मुख्यमंत्री को पत्र भी लिखा है। पत्र में उन्होंने मांग की है कि किसानों के हित में बोनस राशि बढ़ाई जाए और समर्थन मूल्य पर खरीदी को अधिक लाभकारी बनाया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि राज्य सरकार 175 रुपये का बोनस देती है, तो प्रदेश के किसानों को बेहतर आर्थिक सुरक्षा मिल सकती है। साथ ही, खरीदी केंद्रों की सूची सार्वजनिक करने और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बरतने की भी मांग की गई है।

जल संसाधन विभाग में टेंडर घोटाले के आरोप

मीडिया से बातचीत के दौरान कांग्रेस नेताओं ने केवल गेहूं खरीदी का मुद्दा ही नहीं उठाया, बल्कि राज्य सरकार के अन्य विभागों पर भी सवाल खड़े किए। कांग्रेस के मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने जल संसाधन विभाग में टेंडर प्रक्रिया में कथित कमीशनखोरी के गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि प्रतिशत व्यवस्था के कारण पिछले डेढ़ साल में कोई बड़ा टेंडर जारी नहीं हुआ।

ब्लैकलिस्ट कंपनी पर भी उठे सवाल

मुकेश नायक ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के दौरान जिस कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया गया था, वही कंपनी अब अलग-अलग नामों से टेंडर प्रक्रिया में भाग ले रही है। उन्होंने वर्ष 2023-24 के सभी टेंडरों की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की, ताकि कथित अनियमितताओं का खुलासा हो सके और दोषियों पर कार्रवाई हो।

समर्थन मूल्य और पारदर्शिता पर विपक्ष का दबाव

कुल मिलाकर गेहूं के समर्थन मूल्य, बोनस और विभागीय टेंडरों को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस जहां किसानों के पक्ष में अधिक बोनस और पारदर्शी व्यवस्था की मांग कर रही है, वहीं सरकार की ओर से अभी तक इस पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में गेहूं खरीदी और बोनस का मुद्दा प्रदेश की राजनीति में और तेज होने की संभावना है।