उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सिंगापुर और जापान दौरे के दौरान निवेश आकर्षित करने की कवायद तेज की। इस दौरे में उन्होंने 33 कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ अलग-अलग बैठकों में राज्य में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की। सरकार ने इन वार्ताओं को यूपी को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की व्यापक नीति का हिस्सा बताया है।
राज्य सरकार के मुताबिक, बैठकों का केंद्र बिंदु औद्योगिक निवेश, उत्पादन इकाइयों का विस्तार और दीर्घकालिक साझेदारी रहा। अधिकारियों ने कंपनियों को उत्तर प्रदेश में उपलब्ध औद्योगिक इकोसिस्टम, नीतिगत समर्थन और प्रशासनिक समन्वय के मॉडल की जानकारी दी। इस पहल का उद्देश्य निवेशकों के लिए निर्णय प्रक्रिया को सरल बनाना और परियोजनाओं को जमीन पर तेजी से उतारना है।
दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने यह संदेश भी रखा कि उत्तर प्रदेश अब केवल बड़ा उपभोक्ता बाजार नहीं, बल्कि उत्पादन और निर्यात क्षमता वाला राज्य बनना चाहता है। इसी संदर्भ में सरकार ने अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ प्रत्यक्ष संवाद को प्राथमिकता दी है। उद्योग जगत के साथ लगातार संपर्क को निवेश प्रतिस्पर्धा में राज्य की रणनीतिक जरूरत माना जा रहा है।
33 कंपनियों के साथ बातचीत का दायरा
सिंगापुर और जापान में हुई बैठकों में 33 कंपनियों के प्रतिनिधियों से राज्य की औद्योगिक योजनाओं पर चर्चा की गई। इन वार्ताओं में निवेश प्रस्तावों की संभावनाएं, परिचालन जरूरतें, और राज्य स्तर पर सहयोग की रूपरेखा जैसे मुद्दे शामिल रहे। सरकार का प्रयास रहा कि संभावित निवेशकों को एकीकृत तरीके से नीति, भूमि, बुनियादी ढांचे और विभागीय तालमेल का स्पष्ट रोडमैप दिया जाए।
आधिकारिक रुख यह रहा कि निवेश सिर्फ एमओयू तक सीमित न रहे, बल्कि समयबद्ध क्रियान्वयन की दिशा में आगे बढ़े। इसी वजह से वार्ताओं को फॉलो-अप तंत्र से जोड़ने पर जोर दिया गया। राज्य सरकार ने पहले से चल रही परियोजनाओं के अनुभव को भी नए निवेशकों के सामने रखा, ताकि उन्हें परियोजना निष्पादन का व्यावहारिक भरोसा मिले।
यूपी की मैन्युफैक्चरिंग रणनीति पर फोकस
मुख्यमंत्री के इस दौरे का केंद्रीय संदेश यूपी को मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करना रहा। सरकार का मानना है कि बड़े पैमाने पर औद्योगिक निवेश से रोजगार के अवसर बढ़ते हैं, स्थानीय आपूर्ति शृंखलाएं मजबूत होती हैं और जिलों में आर्थिक गतिविधि का फैलाव होता है। इस रणनीति में राज्य स्तरीय औद्योगिक नीतियों को अंतरराष्ट्रीय निवेश संवाद से जोड़ने की कोशिश दिखी।
सरकार ने निवेशकों के साथ बातचीत में यह भी रेखांकित किया कि औद्योगिक परियोजनाओं के लिए संस्थागत समर्थन और प्रशासनिक समन्वय को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे परियोजनाओं के प्रारंभिक चरणों में आने वाली प्रक्रियात्मक बाधाएं कम करने का लक्ष्य है। निवेशकों की जरूरत के अनुसार विभागीय स्तर पर समर्पित समन्वय तंत्र को भी महत्वपूर्ण बताया गया।
ग्लोबल निवेश संपर्क और राज्य की प्रतिस्पर्धा
सिंगापुर और जापान जैसे आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण देशों में सीधी निवेश वार्ता को यूपी के लिए प्रतिस्पर्धी रणनीति माना जा रहा है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निवेश आकर्षित करने की दौड़ में राज्य सरकारें अब सेक्टर-आधारित संवाद, रोडशो और कंपनी-स्तरीय बैठकों का अधिक इस्तेमाल कर रही हैं। इसी पैटर्न में यूपी ने भी निवेशकों तक सीधा पहुंच बनाने का प्रयास किया।
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह के दौरे का असर तब दिखता है जब वार्ता के बाद परियोजनाएं तय समय में आगे बढ़ें। इसलिए सरकार के लिए अगला चरण फॉलो-अप, नीति स्पष्टता और परियोजना कार्यान्वयन की गति बनाए रखना होगा। निवेश की घोषणा और वास्तविक उत्पादन के बीच की दूरी कम करना ही किसी भी निवेश अभियान की सफलता तय करता है।
आगे की राह
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सिंगापुर-जापान दौरे से यह संकेत गया कि उत्तर प्रदेश वैश्विक कंपनियों के साथ दीर्घकालिक निवेश संबंधों पर काम कर रहा है। 33 कंपनियों से हुई बातचीत को राज्य सरकार औद्योगिक विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण चरण के रूप में पेश कर रही है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि इन संवादों में से कितने प्रस्ताव औपचारिक परियोजनाओं और वास्तविक उत्पादन इकाइयों में बदलते हैं।
राज्य की औद्योगिक नीति का अगला परीक्षण क्रियान्वयन स्तर पर होगा। यदि निवेश वार्ताएं समयबद्ध फैसलों में बदलती हैं, तो यूपी की मैन्युफैक्चरिंग महत्वाकांक्षा को ठोस आधार मिल सकता है। फिलहाल, सरकार ने अंतरराष्ट्रीय निवेश मंचों पर अपनी उपस्थिति बढ़ाकर संकेत दिया है कि वह वैश्विक पूंजी और उत्पादन नेटवर्क में राज्य की हिस्सेदारी बढ़ाने के लक्ष्य पर केंद्रित है।











