मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन को एक बड़ी स्वास्थ्य सौगात मिलने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि उज्जैन में देश का पहला आयुर्वेदिक अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) स्थापित किया जाएगा। यह संस्थान पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धति के क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित होगा।
मुख्यमंत्री ने यह ऐलान उज्जैन के दशहरा मैदान में आयोजित छह दिवसीय वन मेले का शुभारंभ करते हुए किया। यह मेला 11 से 16 फरवरी तक चलेगा, जिसमें वनोपज और हर्बल उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई गई है। इस घोषणा के बाद उज्जैन अब आधुनिक चिकित्सा के साथ-साथ आयुर्वेदिक उपचार और अनुसंधान का भी एक प्रमुख केंद्र बन जाएगा।
महाकाल की नगरी को पीएम का आशीर्वाद
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस सौगात का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के आशीर्वाद से ही महाकाल की नगरी को यह विशेष पहचान मिल रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आशीर्वाद से महाकाल की नगरी उज्जैन को आयुर्वेदिक एम्स की सौगात मिलेगी – डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री
इस घोषणा से स्पष्ट है कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह संस्थान न केवल प्रदेश के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करेगा, बल्कि आयुर्वेद के क्षेत्र में शोध और शिक्षा के नए अवसर भी पैदा करेगा।
आयुर्वेद के लिए एक ऐतिहासिक कदम
अभी तक देश में एलोपैथिक चिकित्सा पर आधारित एम्स ही कार्यरत हैं। उज्जैन में आयुर्वेदिक एम्स की स्थापना अपनी तरह की पहली और अनूठी पहल है। इससे आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान मिलेगी और इस प्राचीन चिकित्सा पद्धति पर लोगों का विश्वास और भी मजबूत होगा।
माना जा रहा है कि इस संस्थान के बनने से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और उज्जैन की अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। यह आयुर्वेदिक पर्यटन को भी बढ़ावा दे सकता है, जहां देश-विदेश से लोग उपचार के लिए आ सकेंगे। इस घोषणा ने स्वास्थ्य और कल्याण के क्षेत्र में एक नए अध्याय की शुरुआत की है।











