जर्जर लाइनों पर टिका Indore का वाटर सप्लाई, शहर के हर कोने की पेयजल पाइप-लाइन में लीकेज

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By Abhishek SinghPublished On: January 9, 2026
indore pipeline

शहर की पेयजल आपूर्ति प्रणाली गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है। निगम द्वारा अमृत-2 योजना के तहत कराए गए अध्ययन में सामने आया है कि कई क्षेत्रों में 50 वर्ष से अधिक पुरानी पाइपलाइनें अब भी उपयोग में हैं। करीब 3,500 किलोमीटर लंबी कुल पेयजल पाइपलाइन में से लगभग 650 किलोमीटर हिस्सा पूरी तरह जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है।

शहर में होने वाले कुल लाइन लॉस का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा खुद शहरी क्षेत्र में ही दर्ज हो रहा है, जिससे पाइपलाइनों में बड़े पैमाने पर लीकेज और सीपेज की समस्या स्पष्ट होती है। स्थिति यह है कि जल वितरण की जिम्मेदारी पर्याप्त रूप से प्रशिक्षित कर्मियों के बजाय अकुशल स्टाफ के पास है। नर्मदा परियोजना से जुड़े पीएचई विभाग में केवल 10 प्रतिशत कर्मचारी ही तकनीकी रूप से दक्ष हैं। जबकि पूरी व्यवस्था के सुचारु संचालन के लिए 32 इंजीनियरों की आवश्यकता है, मौजूदा समय में महज 4 इंजीनियर ही कार्यरत हैं।

टंकियों और मैदानी स्तर पर तकनीकी कर्मचारियों की उपलब्धता भी घटकर मात्र 20 प्रतिशत रह गई है। शेष कार्य व्यवस्था मस्टर कर्मियों और निजी एजेंसियों के भरोसे संचालित हो रही है। अधिकारियों के अनुसार कुल लाइन लॉस 15 से 17 प्रतिशत के बीच है, जिसमें 40 प्रतिशत से अधिक नुकसान वितरण पाइपलाइनों से हो रहा है। इससे स्पष्ट है कि पाइपलाइनों में व्यापक लीकेज मौजूद हैं, जिनके जरिए पानी में दूषित तत्व मिलकर उसे प्रदूषित कर रहे हैं।

इन इलाकों में समस्या अधिक गंभीर बनी हुई है—जूनी इंदौर, जूना रिसाला, मिल क्षेत्र, जबरन कॉलोनी, आजाद नगर, मूसाखेड़ी, भागीरथपुरा, लाबरिया भेरू, चंदननगर और बाणगंगा क्षेत्र के कई हिस्सों में पानी की मिक्स सप्लाई की स्थिति है। यहां बार-बार पाइपलाइनों में लीकेज सामने आ रहे हैं, जिसके चलते ये क्षेत्र धीरे-धीरे दूषित जल आपूर्ति के हॉटस्पॉट बनते जा रहे हैं।

एक दिन छोड़कर सप्लाई

शहर में एक दिन छोड़कर जलापूर्ति की जा रही है, जिसके बाद 30 से 40 घंटे तक पाइपलाइनों में पानी नहीं रहता। कई क्षेत्रों में पेयजल लाइनों के आसपास सीवरेज लाइनें बनी हुई हैं, और सप्लाई बंद रहने के दौरान बनने वाला वैक्यूम इन नालियों का दूषित पानी पाइपलाइनों में खींच लेता है।

अब भी पुरानी लाइनों से हो रही सप्लाई

कई इलाकों में पेयजल वितरण दोहरी पाइपलाइन के माध्यम से हो रहा है, यानी पुरानी और नई दोनों लाइनों से पानी सप्लाई किया जा रहा है। पुरानी लाइनों को नई लाइनों से जोड़ा गया है, लेकिन कई पुराने कनेक्शन नई लाइनों पर स्थानांतरित नहीं किए गए हैं। अनुमानित रूप से 20 से 30 फीसदी कनेक्शन अभी भी पुरानी लाइनों पर बने हुए हैं।