Shani Gochar 2026: वैदिक ज्योतिष में शनि को कर्म और न्याय का ग्रह माना जाता है। शनि की चाल में होने वाला हर छोटा-बड़ा बदलाव सभी 12 राशियों पर गहरा असर डालता है। ज्योतिष गणना के अनुसार, साल 2026 में शनि देव मीन राशि में ही विराजमान रहेंगे। इस गोचर के दौरान शनि का पाया बदलेगा, जिसका तीन राशियों पर विशेष प्रभाव देखने को मिलेगा।
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, जब शनि किसी जन्म राशि से तीसरे, सातवें या दसवें भाव में गोचर करते हैं, तो इसे ‘तांबे का पाया’ कहा जाता है। यह स्थिति आम तौर पर शुभ मानी जाती है और कई क्षेत्रों में सकारात्मक परिणाम देती है। साल 2026 में तीन राशियां इस शुभ स्थिति का अनुभव करेंगी, जिससे उनके लिए तरक्की के नए रास्ते खुल सकते हैं।
मकर राशि (Capricorn)
साल 2026 में शनि का गोचर मकर राशि के तीसरे भाव में होगा, जिससे यह तांबे के पाये पर चलेंगे। यह स्थिति आपके लिए कई शुभ संकेत लेकर आ रही है। करियर के लिहाज से नौकरी में बदलाव या स्थानांतरण के योग बन रहे हैं। जो लोग विदेश जाने की इच्छा रखते हैं, उनका सपना पूरा हो सकता है। शनि की दृष्टि आपके नवम भाव पर होने से भाग्य का साथ मिलेगा और आध्यात्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी। व्यापार में सोच-समझकर लिए गए फैसले बड़ा मुनाफा दे सकते हैं। हालांकि, माता-पिता के स्वास्थ्य को लेकर थोड़ी सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
कन्या राशि (Virgo)
कन्या राशि के लिए शनि सातवें भाव में प्रवेश करेंगे, जो करियर और व्यापार में उल्लेखनीय लाभ का संकेत दे रहा है। यदि आप कोई नया काम शुरू करने या व्यापार के विस्तार के लिए बैंक से कर्ज लेने की योजना बना रहे हैं, तो उसमें सफलता मिल सकती है। इस अवधि में की गई यात्राएं आर्थिक रूप से फायदेमंद साबित होंगी। निवेश के लिए भी यह समय अनुकूल रहेगा। पारिवारिक जीवन में सुख-शांति का माहौल बना रहेगा और दांपत्य संबंधों में मधुरता आएगी।
मिथुन राशि (Gemini)
मिथुन राशि के जातकों के लिए शनि का दशम (कर्म) भाव में गोचर अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकता है। शनि और इस राशि के स्वामी बुध के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध होने के कारण आपको कार्यक्षेत्र में अपनी मेहनत का पूरा फल मिलेगा। आपकी कार्यक्षमता की सराहना होगी, जिससे पदोन्नति और वेतन वृद्धि के प्रबल योग बनेंगे। व्यापार में बनाई गई रणनीतियां सफल होंगी और आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। शनि की दृष्टि आपके खर्चों के भाव पर भी रहेगी, जिससे अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण लगेगा और बचत बढ़ेगी।










