उत्तरकाशी में बादल फटने से 17 की मौत, तो उफनती यमुना से दिल्ली में बढ़ी टेंशन

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नई दिल्ली। उत्तराखंड और हिमाचल में बारिश और बाढ़ ने तबाही मचा रखी है। सबसे ज्यादा नुकसान उत्तराखंड में हुआ है। बारिश व बाढ़ के कारण प्रदेश के आठ जिलों की स्थिति गंभीर बनी हुई है। बताया जा रहा है कि उत्तरकाशी के मोरी क्षेत्र में बादल फटने से 17 लोगों की मौत हो गई, जबकि भूस्खलन से पहाड़ टूटकर सड़कों पर आ गिरा है। इस कारण 800 से अधिक सड़कों पर यातायात रोका गया है। इधर, हरियाणा में स्थित हथिनीकुंड बैराज (ताजेवाला) से 8,28,072 क्यूसेक पानी यमुना नदी में छोड़ा गया है। इस कारण युमना नदी खतरे के निशान से उपर बह रही है। दिल्ली में कई जगह बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं।

आपदा प्रबंधन के सचिव एस ए मुरुगेसन के मुताबिक उत्तरकाशी के मोरी तहसील में बादल फटने से 17 लोगों की मौत हो गई है। राहत और बचाव कार्य चल रहा है। इधर, मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में नौ नेशनल हाईवे समेत 887 से ज्यादा सड़कें बाधित है। कालका-शिमला और पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेल ट्रैक मलबा और पेड़ गिरने से ठप रहे। प्रदेश के तीनों एयरपोर्ट गगल, भुंतर और शिमला में हवाई उड़ानें प्रभावित रहीं। प्रदेश में हाईवे समेत सैकड़ों सड़कें कई मीटर तक बह गईं। दर्जनों पुल क्षतिग्रस्त हो गए। कुल्लू-मनाली, लाहौल और किन्नौर में हजारों देसी-विदेशी सैलानी और बौद्ध भिक्षु फंस गए हैं। बारिश से 100 के करीब घर और गोशालाएं जमींदोज हो गई हैं। इस सीजन में अब तक करीब 190 लोगों की मौत हो चुकी है।

दिल्ली में यमुना का जलस्तर बढ़ा

हरियाणा में स्थित हथिनीकुंड बैराज (ताजेवाला) से 8,28,072 क्यूसेक पानी यमुना नदी में छोड़ा गया है। इस कारण दिल्ली में बाढ़ से हालात पैदा हो गए हैं। बताया जा रहा है कि हथिनीकुंड के इतिहास में अब तक इतना पानी एक बार में कभी नहीं छोड़ा गया। यमुना का लगातार जलस्तर बढ़ने की खबर के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सभी अफसरों को सतर्क कर दिया है और बाढ़ से निपटने के लिए इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं।