ओंकारेश्वर में आचार्य शंकर की 108 फीट की बहुधातु प्रतिमा, संस्थान की स्थापना के लिये भूमि आवंटित

आचार्य शंकर प्रतिमा तथा शंकर संग्रहालय हेतु मांधाता पर्वत पर लगभग 11.50 हेक्टेयर भूमि एवं आचार्य शंकर अंतर्राष्ट्रीय अद्वैत वेदांत संस्थान हेतु गोदड़पुरा पर्वत पर लगभग 22.10 हैक्टेयर भूमि संस्कृति विभाग को आवंटित है।

इंदौर: आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास एवं मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग द्वारा खंडवा जिले के ओंकारेश्वर में आचार्य शंकर की 108 फीट की बहुधातु प्रतिमा, शंकर संग्रहालय एवं आचार्य शंकर अंतर्राष्ट्रीय अद्वैत वेदांत संस्थान की स्थापना की जा रही है। आचार्य शंकर प्रतिमा तथा शंकर संग्रहालय हेतु मांधाता पर्वत पर लगभग 11.50 हेक्टेयर भूमि एवं आचार्य शंकर अंतर्राष्ट्रीय अद्वैत वेदांत संस्थान हेतु गोदड़पुरा पर्वत पर लगभग 22.10 हैक्टेयर भूमि संस्कृति विभाग को आवंटित है।
व्यवस्थित पुनर्वास किया जायेगा
आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास के प्रभारी अधिकारी डॉ. शैलेन्द्र मिश्रा ने बताया कि आचार्य शंकर संग्रहालय के लिये मांधाता पर्वत पर आवंटित परिसर में अस्थाई रूप से निवासरत लगभग 30 परिवारों को नगर परिषद ओंकारेश्वर द्वारा ओंकारेश्वर नगर में पुर्नवास के लिये आवास निर्माण हेतु भूमि चिन्हांकित की गई है। इस भूमि पर आवास निर्माण किये जाने हेतु प्रत्येक परिवार के बैंक खाते में 2.50 लाख रूपये की राशि संस्कृति विभाग द्वारा नगर परिषद के माध्यम से प्रदान की जायेगी।

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36 हेक्टेयर भूमि पर सघन वृक्षारोपण होगा
आचार्य शंकर संग्रहालय परिसर में स्थित 06 मंदिरों – शिव मंदिर, सांई मंदिर, शनि मंदिर, राम मंदिर, नर्मदा मंदिर तथा निखिल आश्रम में स्थापित मूर्तियों की प्राणप्रतिष्ठा विधि-विधान के साथ विद्वान आचार्य के माध्यम से राजराजेश्वरी मंदिर में की जायेगी। इन मंदिरों के पुजारियों के लिये परिसर के बाहर अन्यत्र स्थान पर अस्थाई कुटिया उपलब्ध कराई जायेगी।
आगामी 28 जून 2022 हरियाली अमावस्या से मांधाता पर्वत पर सघन वृक्षारोपण प्रारंभ किया जा रहा है। इस वृक्षारोपण में नीम, पीपल, वटवृक्ष, गुलमोहर, बेलपत्र, पलाश, करंज तथा कचनार आदि पौधे लगाये जायेंगे। लगाये जाने वाले पौधों की उंचाई 08 से 10 फीट की होगी ताकि वर्षाऋतु में ये पौधे जड़ पकड़ सकेंगे। डेढ वर्ष तक इन पौधों का प्रबंधन, पोषण व रखरखाव भी किया जायेगा।

मुख्यमंत्री के द्वारा पूर्व में घोषणा कि गई थी कि मांधाता पर्वत पर 25 हेक्टेयर भूमि में पौधा रोपण किया जायेगा। इस घोषणा के परिपालन में अब 25 हैक्टेयर के स्थान पर लगभग 36 हेक्टेयर भूमि में केवल सघन वृक्षारोपण किया जा रहा है। जिससे मांधाता पर्वत का परिवेश पूर्ण रूप से प्राकृतिक एवं आध्यात्मिक रहेगा। पौधारोपण में ऐसे पौधों का उपयोग किया जायेगा जो मांधाता पर्वत को वर्ष भर हराभरा रखेंगे।
नहीं होगी ब्लास्टिंग
मांधाता पर्वत पर शंकर संग्रहालय के निर्माण हेतु अभी तक न तो कोई ब्लास्टिंग की गई है और न ही की जायेगी। मांधाता पर्वत पर होटल, स्वीमिंग पूल एवं मॉल जैसी किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधियां नहीं की जाना है, इससे स्पष्ट है कि यहां भौतिक सुविधाओं का विस्तार नहीं किया जायेगा। मांधाता पर्वत पर शंकर संग्रहालय के निर्माण के दौरान यदि कोई मूर्तियाँ प्राप्त होती हैं तो उन मूर्तियों को शंकर संग्रहालय में यथोचित स्थान दिया जायेगा। यदि प्राप्त होने वाली मूर्तियाँ प्राचीन ऐतिहासिक महत्व की होंगी तो उन्हें पुरातत्व विभाग को संरक्षण हेतु सौंपा जायेगा।

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किसी भी प्राचीन आश्रम का नहीं हो रहा है विस्थापन
किसी भी प्राचीन आश्रम एवं जनजातीय समाज का विस्थापन नहीं किया जा रहा है। प्राचीन पैदल परिक्रमा पथ यथावत रहेगा। इस परिक्रमा पथ में किसी प्रकार का कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा अपितु इस प्राचीन परिक्रमा मार्ग का सौंदर्यीकरण किया जायेगा। माँ नर्मदा का अविरल प्रवाह वर्ष भर यथावत रहेगा। परिक्रमा पथ को छायादार बनाते हुये मार्ग में परिक्रमावासियों के बैठने के लिये बेंच एवं पीने के पानी की व्यवस्था भी की जायेगी। जल परिक्रमा पथ भी निरंतर रहेगा। किसी भी प्रकार से दोनों मार्ग बाधित नहीं होंगे। परिक्रमा मार्ग में संचालित दुकानें, संग्रहालय परिसर से बाहर होने के कारण इन्हें मांधाता पर्वत से हटाने की कोई योजना नहीं है। शंकर संग्रहालय, आचार्य शंकर की प्रतिमा एवं आचार्य शंकर अंतर्राष्ट्रीय वेदांत संस्थान की स्थापना हेतु ओंकारेश्वर नगर में से किसी भी निवासी अथवा दुकानदारों को नहीं हटाया जायेगा क्योंकि यह परियोजना ओंकारेश्वर नगर से पृथक स्थान पर प्रस्तावित है।

निर्माण में होगा देशज सामग्री का उपयोग
मांधाता पर्वत पर आचार्य शंकर की प्रतिमा, शंकर संग्रहालय एवं आचार्य शंकर अंतर्राष्ट्रीय अद्वैत वेदांत संस्थान की स्थापना में भारतीय वास्तु एवं स्थापत्य को ध्यान में रखते हुये देशज सामग्री पत्थर, काष्ठ, मिट्टी, ईंट आदि का अधिकतम उपयोग करते हुये पर्यावरण अनुकूल निर्मितियाँ की जायेंगी। मांधाता पर्वत को प्रदूषण मुक्त रखने हेतु केवल सीएनजी एवं इलेक्ट्रानिक वाहनों को ही प्रवेश की अनुमति दी जायेगी। प्रकल्प में विभिन्न स्थानों पर 03 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी बनाये जायेंगे। सौर एवं अन्य वैकल्पिक उर्जा तथा जैविक सामग्रियों का उपयोग करते हुये यह परियोजना शून्य अपशिष्ट आधारित होगी। इस परियोजना से रोजगार सृजन के नये अवसर भी उपलब्ध होंगे।