Rafale Nuclear Capability: परमाणु हथियार ले जाने वाले राफेल की तैनाती पर फ्रांस का फोकस, रूस को रोकने की रणनीति

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By EditorPublished On: October 28, 2026

पेरिस 

डिफेंस और जियोपॉलिटिक्स के अखाड़े में एक ऐसा महा-विस्फोट हुआ है, जिसने रूस से लेकर अमेरिका के वॉर रूम तक में खलबली मचा दी है. अमेरिका का न्यूक्लियर अंब्रेला अब धीरे-धीरे हट रहा है, और यूरोप पर मंडराते इस खौफनाक खतरे के बीच फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने एक ऐसा प्लान बनाया है, जो दुनिया का नक्शा कभी भी बदल सकता है. फ्रांस अब अपने सबसे घातक, आसमान के राजा यानी राफेल फाइटर जेट को न्यूक्लियर तबाही का ऐसा ब्रह्मास्त्र बनाने जा रहा है, जिसके सामने आते ही रूस के पसीने छूट जाएंगे. अमेरिकी दबाव के बीच यूरोप की सुरक्षा का ठेका अपने कंधों पर उठाने वाले फ्रांस का यह ‘फॉरवर्ड डिटेरेंस’ प्लान आखिर है क्या? आइए जानते हैं इसकी इनसाइड स्टोरी। 

ASMP-A मिसाइल से लैस होगा राफेल
भारत के पास भी फ्रांस का यही राफेल सिस्‍टम है.  फ्रांस का यह नया गेम-चेंजर प्लान पूरी तरह से राफेल फाइटर जेट्स की असीम मारक क्षमता पर टिका है. राफेल केवल एक सामान्य लड़ाकू विमान नहीं बल्कि फ्रांस की घातक ASMP-A न्यूक्लियर-टिप वाली एयर-लॉन्च्ड क्रूज मिसाइल (Air-launched Cruise Missile) को ले जाने में सक्षम है. इसका सीधा मतलब यह है कि अगर युद्ध के हालात बनते हैं, तो राफेल मिनटों में उड़ान भरकर दुश्मन के ठिकानों पर धड़ाधड़ परमाणु हमला कर सकता है. समुद्र में तैनात परमाणु पनडुब्बियों के साथ-साथ अब हवा से मिलने वाली यह न्यूक्लियर शक्ति रूसी सैन्य प्लानिंग के छक्के छुड़ाने के लिए पूरी तरह तैयार की जा रही है. सहयोगी देशों के एयरबेस पर राफेल की तैनाती से फ्रांस की मारक पहुंच का दायरा काफी हद तक बढ़ जाएगा। 

10 यूरोपीय देश आए साथ
द वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्रांस के इस फॉरवर्ड डिटेरेंस अभियान में 10 प्रमुख यूरोपीय देश शामिल हो रहे हैं, जिनमें यूके, जर्मनी, पोलैंड, नीदरलैंड्स, बेल्जियम, ग्रीस, फिनलैंड, नॉर्वे, स्वीडन और डेनमार्क शामिल हैं. हाल ही में 23 अक्टूबर को फ्रांस ने अपनी ‘रम्मी’ नामक न्यूक्लियर वॉर एक्सरसाइज आयोजित की थी, जिसमें पहली बार ब्रिटिश रॉयल एयर फोर्स के टाइफून फाइटर जेट्स ने भी हिस्सा लिया. यह अभ्यास सीधे तौर पर एक सिमुलेटेड परमाणु हमले का ट्रेल था. भले ही परमाणु हथियारों का अंतिम कंट्रोल सिर्फ फ्रांस के हाथ में रहेगा, लेकिन यह नया गठबंधन साफ संदेश दे रहा है कि यूरोप अब बिना अमेरिका की बैसाखियों के भी दुश्मनों का नामोनिशान मिटाने के लिए पूरी तरह तैयार है।