नई दिल्ली
अगस्त 2015, श्रीलंका में तीन मैचों की टेस्ट सीरीज का निर्णायक मुकाबला। पहला मैच 63 रन से जीती भारतीय टीम दूसरे मैच को 278 रन से गंवा चुकी थी। टॉस जीतकर एंजेलो मैथ्यूज ने गेंदबाजी चुनी लेकिन पहले तीन दिन बारिश ने दोनों टीमों को खूब छकाया। इस बारिश के बीच टीम इंडिया ने चेतेश्वर पुजारा के शतक और गेंदबाज अमित मिश्रा के 59 रन के दम पर बोर्ड पर 312 रन टांगे। जवाब में ईशांत शर्मा की लहराती हुई गेंदों के सामने मेजबान टीम 201 रन पर सिमट गई। ईशांत ने इस पारी में 5 विकेट लिए।
पहली पारी में 111 रन की लीड के बाद भारत ने दूसरी पारी में 274 रन बनाकर श्रीलंका को मैच और सीरीज जीतने के लिए 374 रन का टारगेट दिया। कप्तान मैथ्यूज के शतक के दम पर श्रीलंका ने हाथ-पैर तो खूब मारे, लेकिन पूरी टीम मिलकर सिर्फ 268 रन ही बना पाई। अश्विन के 4 और ईशांत के 3 विकेट के दम पर भारत ने यह मैच 117 रन से जीता। भारत ने श्रीलंका की धरती पर पूरे 22 साल बाद कोई टेस्ट सीरीज जीती। साथ ही, 2011 के वेस्टइंडीज दौरे के बाद विदेशी सरजमीं पर यह भारत की पहली टेस्ट सीरीज जीत थी। और ये सब हासिल हुआ उस व्यक्ति की कप्तानी में जो आगे चलकर भारत ही नहीं पूरी दुनिया में टेस्ट के बेस्ट कप्तानों में से एक बना- विराट कोहली।
जब विराट कोहली ने ऑस्ट्रेलिया को दिखाया था आईना
यह जीत कई मायनों में भारतीय क्रिकेट के लिए बेहद खास थी और इसका महत्व समझने के लिए आपको थोड़ा सा पीछे चलना होगा। साल 2014, बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के लिए हम ऑस्ट्रेलिया में थे। कप्तान एमएस धोनी की चोट ने टीम की कमान विराट कोहली तक पहुंचा दी और कोहली ने पहले मैच से ही प्रॉपर देहलवी एटिट्यूड दिखाना शुरू कर दिया था। पहली पारी में इन्होंने 115 रन कूट डाले। भारत को आखिरी दिन 364 रन का टारगेट मिला। दुनियाभर के क्रिकेट पंडितों से मन मिला चुका टीम मैनेजमेंट भी इस मैच को ड्रॉ कराना चाहता था, लेकिन कोहली ने कहा- ड्रॉ तब होगा जब हम जीतने से पीछे हटेंगे।
मुरली विजय की ओपनिंग के बाद आए कोहली खूब लड़े। विजय अपने शतक से एक रन पहले आउट हो गए, लेकिन कोहली मारते रहे। अकेले 141 रन ठोके और टीम को 300 के पार भी करा दिया।।। हालांकि ये मैच ऑस्ट्रेलिया ने 48 रन से जीत लिया लेकिन इस हार ने भी दुनिया को बता दिया था कि मौसम अब बदलने वाला है। गाबा टेस्ट से पहले धोनी लौट आए, भारत ने वह मैच 4 विकेट से गंवा दिया। मेलबर्न में सीरीज का तीसरा मुकाबला ड्रॉ रहा।
मिचेल जॉनसन के खिलाफ आक्रमक रवैया…
ये वही मैच है जहां ऑस्ट्रेलियन फील्डर मैदान के बाहर से गेंदें लाते और मिचेल जॉनसन विराट कोहली के चुम्मे पकड़ते-पकड़ते थक गए थे। पहली पारी में शतक और दूसरी में अर्धशतक लगाने वाले कोहली ने इस मैच में मिचेल जॉनसन को खुले हाथ से बाउंड्रीज और फ्लाइंग किसेज की सौगातें दी थी। हालांकि, अब तक किसी को भनक भी नहीं थी कि इस मैच के बाद भारतीय टेस्ट क्रिकेट हमेशा के लिए बदलने वाला है।
विराट बने परमानेंट टेस्ट कैप्टन
मैच के बाद एमएस धोनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में आए, सवालों के जवाब दिए और वापस लौट गए। कुछ ही देर बाद बीसीसीआई ने एक रिलीज जारी कर बताया कि धोनी ने टेस्ट क्रिकेट से रिटायरमेंट ले लिया है। विराट का राज्याभिषेक हुआ और टीम सिडनी में चौथा टेस्ट खेलने उतरी। कप्तान कोहली ने इस मैच की पहली पारी में फिर शतक बना दिया। मैच ड्रॉ रहा और ऑस्ट्रेलिया ने सीरीज 2-0 से जीत ली। विराट ने इस सीरीज के 4 टेस्ट की 8 पारियों में 86.50 की औसत से 692 रन बनाए। साथ ही वह एक ही सीरीज में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उसी की सरजमीं पर 4 शतक जड़ने वाले वह पहले भारतीय भी बने।
बतौर बल्लेबाज कोहली का गोल्डन पीरियड चल रहा था। फॉर्म ऐसी कि हाथ में लॉलीपॉप भी दे तो शतक ही आएगा। लेकिन टेस्ट फॉर्मेट में टीम इंडिया डूब रही थी। रैंकिंग में हम 7वें नंबर पर थे। इस सीरीज हार से पहले इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया में 0-4 और 04 से दो सीरीज पहले भी हार चुके थे। यहां से विराट को ना सिर्फ एक मजबूत टीम तैयार करनी थी, बल्कि विदेश में लगातार हार का सिलसिला भी तोड़ना था। सिलसिला टूटा और भारत को श्रीलंका के खिलाफ वह जीत हासिल हुई जिसका जिक्र हमने शुरुआत में किया था।
टेस्ट क्रिकेट का स्वर्णिम युग…
फिर शुरू हुआ भारतीय टेस्ट क्रिकेट का स्वर्णिम युग। कोहली की कप्तानी में भारत ने 2016 में वेस्टइंडीज को 2-0 से, 2017 में श्रीलंका को 3-0 से उसी के घर में हराया लेकिन भारत को असली कामयाबी साल 2018 में मिली। जब हमने पहली बार ऑस्ट्रेलिया को उसी के घर में 2-1 से रौंदा। विराट कोहली एशिया के पहले ऐसे कप्तान जिनकी टीम ऑस्ट्रेलियाई सरजमीं पर सीरीज जीती थी। फिर भारत ने वेस्टइंडीज को 2019 में दोबारा पटखनी दी। हालांकि इस बीच भारतीय टीम को 2018 में इंग्लैंड से 1-4 और साउथ अफ्रीका से 2021 में 1-2 से हार भी झेलनी पड़ी। ये हार ठीक ही रही क्योंकि सबकुछ जीत लेते तो विराट कोहली को लोग सिकंदर बना लेते जबकि वो तो GOAT हैं।
विराट की ही कप्तानी में 2021 के ऐतिहासिक इंग्लैंड दौरे पर भारत ने लॉर्ड्स और ओवल में शानदार जीत दर्ज करते हुए सीरीज में 2-1 की लीड ली थी। हालांकि इस सीरीज का 5वां मैच कोरोना वायरल के चलते 2022 में खेला गया और हमारी हार के साथ यह सीरीज ड्रॉ पर खत्म हुई। उस मैच में भारत की कप्तानी जसप्रीत बुमराह के पास थी।
घर में भी विराट का रिकॉर्ड अद्भुत
इससे पहले कि आपको लगे कि कप्तान विराट बाहर के शेर हैं, जहा एक नजर उनके घरेलू आंकड़ों पर डाल लीजिए। 11 टेस्ट सीरीज, 11 जीत। कोई ड्रॉ नहीं, हार का तो नाम मत लीजिएगा, वो इन्हें पसंद नहीं। इस दौरान न्यूजीलैंड, साउथ अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड की टीमें बार-बार आईं, लेकिन सब खाली हाथ ही लौटीं। इंडिया 2017 से 2021 तक लगातार 5 साल तक दुनिया की नंबर एक टीम रही। विराट ने 2021 में टेस्ट कप्तानी छोड़ने से पहले कप्तान के रूप में 68 मैचों में 40 जीते और सिर्फ 17 हारे। 11 मैच ड्रॉ रहे। विराट की कप्तानी में जीत प्रतिशत 60 था। भारत का कोई भी कप्तानी इस मामले में उनके आस-पास भी नहीं था।
लेकिन लगातार सफलता का सबसे बड़ा नुकसान ये है कि हम जमीन पर पैर रखना तौहीन समझने लगते हैं। विराट ने घर में इतने मैच जिताए कि फैंस भारतीय पिचों पर होने वाली टेस्ट सीरीजों को फॉर ग्रांटेड लेने लगे। 7 साल विराट ने भारतीय टेस्ट टीम की कप्तानी की। इस दौरान 31 घरेलू टेस्ट मैचों में से भारत ने सिर्फ 2 हारे। हमारी आदत हो गई थी कि कोई भी टीम यहां आएगी और 2-3 दिन में टेस्ट मैच हार जाएगी। भारत का घर पर हारना ना लोगों के दिल में आता था ना दिमाग में।
भारतीय तेज गेंदबाजों की सबसे तगड़ी फोर्स तैयार की
विराट कोहली की टेस्ट कप्तानी का सबसे बड़ा और स्थाई योगदान भारतीय तेज गेंदबाजी को हमेशा के लिए बदलना था। उन्होंने रवि शास्त्री के साथ मिलकर एक ऐसी पेस बैटरी तैयार की जो विदेशी जमीन पर हमारा बड़ा हथियार बनी। विराट का मानना था कि किसी भी स्थिति में टेस्ट मैच जीतने के लिए 20 विकेट लेना अनिवार्य है। और इसके लिए उन्होंने तेज गेंदबाजों के फिटनेस मानकों, रोटेशन पॉलिसी और आक्रामक रवैये पर सबसे ज्यादा जोर दिया। विराट के अंडर भारतीय पेस अटैक ने घर में स्पिन-अनुकूल पिचों के भरोसे रहने की पुरानी परंपरा को तोड़ते हुए साउथ अफ्रीका, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया की उछालभरी और तेज पिचों पर विरोधी टीमों के 20 विकेट चटकाए। इस वर्ल्ड-क्लास तेज गेंदबाजी आक्रमण के दम पर ही भारत ने विदेशी मैदानों पर लगातार जीत का परचम लहराया।










