Chaitra Navratri kanya Pujan : चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है। 30 मार्च से आरंभ हुए चैत्र नवरात्र 6 अप्रैल को समाप्त होगी। इस दौरान मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की विधिवत पूजा की जाएगी। बता दे की नवरात्रि में कन्या पूजन का भी विधान है। हिंदू धर्म में छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप माना जाता है। ऐसे में 7 कन्याओं की पूजा के साथ उन्हें भोजन कराते हैं और कई साधक पंचमी से लेकर महा अष्टमी नवमी के दिन कन्या पूजन करते हैं।
महा अष्टमी और नवमी की तिथि को लेकर असमंजस की स्थिति

इस साल चैत्र नवरात्रि 9 दिन की न होकर 8 दिन की है। जिसके कारण महा अष्टमी और नवमी की तिथि को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। शास्त्रों के अनुसार चैत्र नवरात्रि का कन्या पूजन 1 से 10 तक की कन्याओं की पूजा करना सबसे शुभ माना जाता है। 1 से 10 वर्ष तक की कन्याओं को ही कन्या पूजन में शामिल करना चाहिए।
कन्या का पूजन करने का फल भी अलग-अलग
उनकी उम्र की कन्या का पूजन करने का फल भी अलग-अलग मिलता है। हिंदू पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि 4 अप्रैल को रात 8:12 से शुरू हो रही है, जो 5 अप्रैल को शाम 7:00 बजे को 26 मिनट पर समाप्त होगी। इसके बाद महानवमी तिथि का आरंभ होगा। जो 6 अप्रैल को 7:22 मिनट तक रहेगा। ऐसे में महा अष्टमी 5 अप्रैल को और रामनवमी 6 अप्रैल को मनाई जाएगी।
कन्या पूजन के लिए अभिजीत मुहूर्त सबसे अच्छा
महासप्तमी के दिन कन्या पूजन 5 अप्रैल को सुबह 12:00 बजे से दोपहर 12:50 तक किया जा सकता है। रामनवमी के दिन कन्या पूजन के लिए अभिजीत मुहूर्त को सबसे अच्छा माना गया है। ऐसे में रामनवमी के दिन सुबह 11:59 से 12:50 तक कन्या पूजन किया जा सकता है।
हिंदू धर्म में कन्या पूजन का बहुत अधिक महत्व है। नवरात्रि ही नहीं किसी भी शुभ और मांगलिक कार्य के दौरान कन्या पूजन करना शुभ माना जाता है। कन्या पूजन करने से शुभ समृद्धि के साथ कुंडली में ग्रहों की स्थिति मजबूत होने के साथ काम में आने वाली समस्या भी समाप्त होती है।
Note : यह आलेख सामान्य जानकारी पर आधारित है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं। किसी भी जानकारी के लिए अपने ज्योतिषाचार्य की सलाह अवश्य लें।