अखबारों को लोकतांत्रिक विमर्श के रूप में कार्य करना चाहिए – संजय द्विवेदी

पत्रिका के संपादक राकेश शर्मा द्वारा प्रिन्ट मीडिया की वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम के अध्यक्ष कृष्ण कुमार अष्टाना ने पत्रकारिता की नवीन चुनौतियों के साथ वर्तमान स्थिति को लेकर अपने विचार व्यक्त किए।

एक बदलाव भरे समय में हम मौजूद है और हमें अपनी दिशा स्वयं तय करना है। वर्तमान विकसित समाज को संबोधित करना कठिन है इसलिए अखबारों को चाहिए कि वे लोकतांत्रिक विमर्श के रुप में कार्य करें। उक्त विचार भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली के महानिदेशक संजय द्विवेदी ने व्यक्त किए। आप वीणा संवाद केंद्र इंदौर द्वारा आयोजित विशेष व्याख्यान में ’प्रिन्ट मीडिया का भविष्य’ विषय पर संबोधित कर रहे थे।

आपने आगे कहा, कि प्रिंट मीडिया के समक्ष चुनौतियां अवश्य है लेकिन भारत, जापान और चीन में आज भी प्रिन्ट मीडिया का ही बोलबाला है। जिस उत्तम तकनीक का प्रयोग भारत में प्रिन्टिंग के लिए हो रहा है ऎसे में अखबारों को विशिष्टता बोध के साथ अपने अस्तित्व में बदलाव लाना होगा। आपने वर्नाक्युलर, वीडियो और वॉईस के रुप में बदलते माध्यमों के साथ, समाचार और सूचना में अंतर स्पष्ट करते हुए प्रिन्ट मीडिया के समक्ष मौजूद चुनौतियों से जूझने के तरीकों पर चर्चा की।

प्रबुद्धजनों के मध्य श्री मध्यभारत हिंदी साहित्य समिति के शिवाजी सभागृह में आयोजित इस व्याख्यान में समिति के प्रधानमंत्री सूर्यप्रकाश चतुर्वेदी ने स्वागत उद्बोधन दिया। वसुधा गाडगिल ने अतिथि परिचय के साथ ही वीणा संवाद केंद्र की अवधारणा स्पष्ट की। विषय प्रवर्तन करते हुए वीणा पत्रिका के संपादक राकेश शर्मा द्वारा प्रिन्ट मीडिया की वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम के अध्यक्ष कृष्ण कुमार अष्टाना ने पत्रकारिता की नवीन चुनौतियों के साथ वर्तमान स्थिति को लेकर अपने विचार व्यक्त किए। अतिथि स्वागत किया अरविंद ओझा ने व स्मृति चिन्ह प्रदान किया श्री यादव ने। कार्यक्रम का सूत्र संचालन अंतरा करवड़े ने किया।