योगी सरकार का बड़ा फैसला, सेना के कैंट अस्पतालों में मान्य होगा आयुष्मान कार्ड, 12 और केंद्र जुड़ेंगे

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By Pinal PatidarPublished On: February 28, 2026
Yogi MSME

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath राज्य के आयुष्मान भारत योजना से जुड़े लाभार्थियों को नए वर्ष पर बड़ी सौगात देने जा रहे हैं। अब प्रदेश के सभी कैंटोनमेंट (छावनी) अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड धारकों को अत्याधुनिक और निशुल्क चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके लिए स्टेट हेल्थ एजेंसी (साचीज) द्वारा प्रदेश के 12 कैंटोनमेंट अस्पतालों के साथ जल्द ही एमओयू साइन किए जाने की तैयारी है। इस पहल से आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद मरीजों को सेना क्षेत्र के अस्पतालों की उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा।

प्रयागराज मॉडल से मिली प्रेरणा, अब 12 शहरों में होगा विस्तार

प्रदेश में कुल 13 कैंटोनमेंट अस्पताल संचालित हैं, जिनमें से Prayagraj का मॉडल पहले से लागू है और सफल भी रहा है। जनवरी 2026 से प्रयागराज कैंट अस्पताल में कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी और ऑन्कोलॉजी जैसी जटिल बीमारियों का मुफ्त उपचार किया जा रहा है। इस सफलता को देखते हुए सरकार ने अब लखनऊ, वाराणसी, अयोध्या, मेरठ और कानपुर सहित अन्य 12 शहरों के कैंट अस्पतालों को भी आयुष्मान योजना के दायरे में शामिल करने का निर्णय लिया है, जिससे अधिक से अधिक मरीजों को राहत मिल सके।

फ्री ओपीडी, जांच और ‘पिक एंड ड्रॉप’ सुविधा भी शामिल

स्टेट हेल्थ एजेंसी (साचीज) की सीईओ अर्चना वर्मा के अनुसार, इन अस्पतालों में केवल भर्ती उपचार ही नहीं, बल्कि ओपीडी अपॉइंटमेंट और जरूरी जांच भी निशुल्क उपलब्ध होंगी। गंभीर रोगियों के लिए ‘पिक एंड ड्रॉप’ यानी मुफ्त परिवहन सेवा की व्यवस्था भी की गई है, ताकि दूरदराज या आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को अस्पताल तक आने-जाने में किसी प्रकार की परेशानी न हो। यह कदम स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ और समावेशी बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

डिजिटल और पारदर्शी प्रणाली से जुड़ेंगे कैंट अस्पताल

साचीज की एसीईओ डॉ. पूजा यादव ने बताया कि सभी 12 अस्पतालों में प्रक्रियाओं को आयुष्मान योजना के नियमों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है। एमओयू साइन होने के बाद इन अस्पतालों को सीधे आयुष्मान पोर्टल से जोड़ा जाएगा, जिससे बिलिंग और क्लेम सेटलमेंट पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी ढंग से हो सके। इस व्यवस्था से मरीजों को उच्च स्तरीय विशेषज्ञ सेवाएं मिलेंगी और साथ ही सरकारी अस्पतालों पर बढ़ते दबाव में भी कमी आएगी।