Yogi Cabinet Expansion: योगी मंत्रिमंडल में होगा बड़ा फेरबदल, लखनऊ से दिल्ली तक हुई बैठकें

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By Raj RathorePublished On: April 12, 2026
Yogi Cabinet

उत्तर प्रदेश में लंबे समय से सरकार और संगठन में बदलाव की चर्चा चल रही है, लेकिन अब हालात ऐसे बनते दिख रहे हैं कि यह इंतजार जल्द खत्म हो सकता है। हाल के दिनों में हुई अहम बैठकों और नेताओं के बीच लगातार संवाद ने इस अटकल को और मजबूत कर दिया है।

शनिवार को दिल्ली से लौटने के बाद प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। इसके बाद रविवार सुबह भी दोनों नेताओं के बीच बंद कमरे में चर्चा हुई।

बैठकों का सिलसिला तेज

इसी क्रम में पंकज चौधरी दिल्ली पहुंचे और वहां गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इससे संकेत मिल रहे हैं कि संगठन और सरकार दोनों स्तर पर बड़े फैसलों की तैयारी चल रही है। उधर, लखनऊ में भी राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े प्रदेश कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने कई वरिष्ठ नेताओं से अलग-अलग मुलाकात की।

नेताओं से लिया गया फीडबैक

इन मुलाकातों में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, मंत्री धर्मपाल सिंह, पूर्व मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह और पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी शामिल रहे। इसके अलावा पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी, सूर्यप्रताप शाही और रमापति राम त्रिपाठी से भी चर्चा की गई। तीन महिला मंत्रियों से भी अलग-अलग बातचीत कर फीडबैक लिया गया। सूत्रों के मुताबिक, इन बैठकों में संगठन और सरकार दोनों के प्रदर्शन को लेकर खुलकर राय ली गई।

सूत्र बताते हैं कि इन चर्चाओं का मुख्य केंद्र मंत्रिमंडल विस्तार, संगठन में बदलाव और आयोगों व बोर्डों में खाली पदों को भरना रहा। साथ ही प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति को लेकर जमीनी रिपोर्ट भी जुटाई गई।बताया जा रहा है कि विनोद तावड़े ने नेताओं से सीधे सवाल पूछकर मंत्रियों के कामकाज और उनकी छवि को लेकर राय जानी।

मंत्रियों के प्रदर्शन पर सवाल

उन्होंने यह जानने की कोशिश की कि कौन से मंत्री बेहतर काम कर रहे हैं और किनके कामकाज को लेकर असंतोष है। साथ ही संभावित नए चेहरों को लेकर भी सुझाव मांगे गए। संगठन से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई और प्रदेश के सामाजिक समीकरणों को लेकर विशेष फीडबैक लिया गया।

माना जा रहा है कि आगामी विस्तार में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को प्राथमिकता दी जा सकती है। खासतौर पर अवध क्षेत्र में पासी और कुर्मी समाज की नाराजगी और ब्राह्मण वर्ग के मुद्दों पर भी चर्चा हुई। नेताओं ने सुझाव दिया कि पार्टी को पिछड़ा वर्ग की राजनीति के साथ-साथ सवर्ण वर्ग को भी संतुलित करना होगा।