सीएम योगी आदित्यनाथ ने राजस्वों मामलों को जल्द निपटने के दिए निर्देश, बोले – आंकड़ों में नहीं, जमीन पर दिखनी चाहिए राहत

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By Raj RathorePublished On: May 23, 2026
CM Yogi Meeting

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजस्व मामलों के त्वरित और पारदर्शी निस्तारण को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल करते हुए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि भूमि और राजस्व से जुड़े विवाद सीधे आमजन, किसानों और सामाजिक सौहार्द से जुड़े होते हैं, इसलिए इनमें किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।

शनिवार को राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों की समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि तय समय-सीमा के बाद भी लंबित रहने वाले मामलों में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाए। साथ ही ऐसे मामलों में आवश्यक कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए।

आमजन को वास्तविक राहत मिलनी चाहिए

मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि आम नागरिकों को समय पर वास्तविक राहत मिलना सबसे जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि तकनीक आधारित व्यवस्था, जवाबदेही और समयबद्ध कार्यशैली के जरिए राजस्व न्यायालयों को और अधिक प्रभावी बनाया जाए।

सीएम योगी ने विशेष रूप से निर्देश दिए कि लंबे समय से लंबित मामलों के निस्तारण के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। उन्होंने कहा कि तहसील और जिला स्तर पर नियमित समीक्षा की जाए और कमजोर प्रदर्शन करने वाले जिलों की जिम्मेदारी तय हो।

धारा-80 के मामलों में आई कमी

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि आरसीसीएमएस पोर्टल के जरिए धारा-80 के मामलों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। 1 जनवरी 2026 तक कुल 85,158 मामले लंबित थे, जिनमें से 77,578 मामलों का निस्तारण किया गया था।

वहीं 22 मई 2026 तक लंबित मामलों की संख्या घटकर 38,166 रह गई है, जिनमें 29,543 मामलों का निस्तारण किया जा चुका है। तीन माह से अधिक समय से लंबित मामलों की संख्या में भी लगातार कमी दर्ज की गई है।

इन जिलों का प्रदर्शन बेहतर

सरकार की समीक्षा में धारा-80 के मामलों के निस्तारण में बस्ती, चित्रकूट, अयोध्या, बागपत और कन्नौज जिलों का प्रदर्शन बेहतर पाया गया। वहीं मेरठ, वाराणसी, अमेठी, गौतमबुद्धनगर और हापुड़ का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि राजस्व मामलों के निस्तारण में गुणवत्ता और पारदर्शिता के साथ कोई समझौता न किया जाए। उन्होंने कहा कि समयबद्ध न्याय व्यवस्था ही सुशासन की पहचान है और आम लोगों का भरोसा मजबूत करने के लिए प्रशासन को संवेदनशील और जवाबदेह बनना होगा।