जिला परिषद, पंचायत समिति और सरपंच पदों के लिए आरक्षण लॉटरी अब चुनाव बाद होगी जारी

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By EditorPublished On: September 15, 2026

जयपुर
निर्वाचन आयोग को इस कार्यक्रम में बदलाव करने के संबंध में सुझाव दिया था, जिसपर आयोग आने बदलाव करने का फैसला लिया है।

पंचायती राज विभाग की ओर से राज्य निर्वाचन आयोग को अवगत कराया गया था कि शहरी निकाय चुनाव में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के निर्वाचन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही पंचायती राज संस्थाओं की आरक्षण लॉटरी निकाली जाए।

गौरतलब है कि ग्रामीण राजस्थान के सियासी गलियारों में पंचायती राज चुनावों को लेकर काफी लंबे समय से सरगर्मी बनी हुई है। तय शेड्यूल के मुताबिक 17 सितंबर को जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए और 18 सितंबर को ग्राम पंचायतों के सरपंच व वार्ड पंचों के लिए जिला मुख्यालयों पर पारदर्शी लॉटरी प्रणाली से आरक्षण तय किया जाना था।

आरक्षण की स्थिति साफ होने के बाद ही चुनाव लड़ने के इच्छुक ग्रामीण नेता और कार्यकर्ता अपनी-अपनी दावेदारी पक्की करने वाले थे। लेकिन अब इस पूरी प्रक्रिया के टलने से चुनाव लड़ने का इंतजार कर रहे प्रत्याशियों को थोड़ा और इंतजार करना पड़ेगा। जल्द ही नई तिथियों की औपचारिक घोषणा कर दी जाएगी।

समझिए मुख्य वजह
पंचायती राज संस्थाओं की आरक्षण लॉटरी की तारीखें आगे बढ़ाने के पीछे सबसे मुख्य कारण शहरी निकायों (नगर निगम, नगर परिषद और नगरपालिका) में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों के लिए चल रही चुनाव प्रक्रिया है:

17 सितंबर का निकाय शेड्यूल: 17 सितंबर 2026 को शहरी निकाय चुनाव में अध्यक्ष (मेयर/सभापति/अध्यक्ष) पद के नामांकन पत्रों की संवीक्षा का महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्य होना तय है।

18 सितंबर का निकाय शेड्यूल: 18 सितंबर 2026 को प्रत्याशियों द्वारा नाम वापसी और अंतिम उम्मीदवारों को चुनाव चिन्हों का आवंटन किया जाना है।

प्रशासनिक अमले की व्यस्तता: जिला कलेक्टर, उपखंड अधिकारी (SDO), तहसीलदार और पुलिस महकमा पूरी तरह से निकाय चुनाव की व्यवस्थाओं में व्यस्त रहेगा। एक ही समय पर निकाय चुनाव और पंचायती राज लॉटरी दोनों का संचालन करना प्रशासनिक दृष्टिकोण से बेहद चुनौतीपूर्ण था।

अब तक का प्रस्तावित कार्यक्रम
पंचायती राज विभाग द्वारा पहले से तैयार किए गए खाके के अनुसार, राज्य में पंचायती राज संस्थाओं के आम चुनाव को हर हाल में 15 नवंबर 2026 तक पूरा कराया जाना कानूनी रूप से अनिवार्य है।

पुरानी समय-सीमा: 17 सितंबर को जिला परिषद-पंचायत समिति और 18 सितंबर को सरपंचों के लिए लॉटरी निकलने के तुरंत बाद राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव की औपचारिक अधिसूचना जारी करने वाला था।

संशोधित प्रक्रिया: अब माना जा रहा है कि निकाय चुनाव में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों के चुनाव (21-22 सितंबर) संपन्न होने के तुरंत बाद ही पंचायती राज के लिए नई लॉटरी तिथियों का ऐलान किया जाएगा।

15 नवंबर की डेडलाइन: तिथियों में मामूली बदलाव के बावजूद राज्य निर्वाचन आयोग का लक्ष्य 15 नवंबर 2026 तक सभी चरणों की मतदान प्रक्रिया पूरी कराकर नए जनप्रतिनिधियों का गठन करने का रहेगा।

ग्रामीण क्षेत्रों और दावेदारों पर क्या पड़ेगा असर?
राजस्थान के ग्रामीण अंचल में सरपंच और पंचायत समिति सदस्य बनने का सपना देख रहे स्थानीय युवाओं और वरिष्ठ नेताओं की नजरें पूरी तरह से इस आरक्षण प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं। जब तक यह तय नहीं हो जाता कि कौन सी सीट महिला, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) या सामान्य श्रेणी के लिए आरक्षित होगी, तब तक प्रत्याशी अपने स्तर पर प्रचार अभियान पूरी तरह शुरू नहीं कर पा रहे हैं।

लॉटरी टलने से दावेदारों में थोड़ा असमंजस जरूर बढ़ा है, लेकिन प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि यह केवल कुछ ही दिनों की देरी है। निकाय चुनाव संपन्न होते ही सितंबर के अंतिम सप्ताह में ही नई आरक्षण सूची जारी कर दी जाएगी, जिससे उम्मीदवारों को अपनी चुनावी रणनीति बनाने के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा