बड़गाईं-लेम सड़क बदहाल, टेंडर के बाद भी नहीं शुरू हुआ 122 करोड़ का काम

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By EditorPublished On: September 30, 2026

 रांची
 बड़गाईं चौक से लेम चौक तक की जर्जर सड़क के दिन बहुरने का इंतजार चार साल बाद भी खत्म नहीं हुआ है। करीब चार किलोमीटर लंबी इस सड़क के चौड़ीकरण, मजबूतीकरण और पुनर्निर्माण के लिए करीब 122 करोड़ रुपये का डीपीआर तैयार है।

टेंडर की प्रक्रिया भी हो चुकी है, लेकिन जमीन अधिग्रहण और पुल निर्माण से जुड़े मामले अटकने के कारण सड़क निर्माण अब तक शुरू नहीं हो सका है। नतीजा यह है कि रोजाना इस मार्ग से गुजरने वाले हजारों लोगों को गड्ढों, धूल और जाम के बीच आवाजाही करनी पड़ रही है।

बड़गाईं से लेम तक सड़क की हालत खराब
बड़गाईं चौक से लेम चौक तक सड़क कई जगह टूट चुकी है। बारिश के दिनों में गड्ढों में पानी भर जाने से स्थिति और खराब हो जाती है। दोपहिया वाहन चालकों को सबसे अधिक परेशानी होती है। सड़क की खराब स्थिति के कारण वाहनों की रफ्तार भी प्रभावित होती है। महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग होने के बावजूद लंबे समय से इसकी मरम्मत और पुनर्निर्माण का इंतजार किया जा रहा है।

122 करोड़ से होना है सड़क का निर्माण
पथ निर्माण विभाग ने इस मार्ग के चौड़ीकरण और मजबूतीकरण के साथ पुनर्निर्माण की योजना तैयार की है। विभागीय दस्तावेज के अनुसार सड़क की लंबाई करीब 3.750 किलोमीटर है। इसमें बड़गाईं से लेम होते हुए आगे बोरेया तक सड़क का विकास प्रस्तावित है।

वर्तमान में सड़क की चौड़ाई अलग-अलग हिस्सों में करीब 3.75 से सात मीटर तक है। परियोजना के तहत सड़क को सात मीटर चौड़ा किया जाना है।

सड़क के साथ करीब 3750 मीटर पक्की नाली बनाने की भी योजना है। परियोजना में चार नए कलवर्ट और एक नए पुल के निर्माण का भी प्रस्ताव है। दस्तावेज के अनुसार सड़क के लिए करीब 10 से 12 मीटर चौड़ाई में भूमि उपलब्ध कराने की जरूरत है।

जमीन नहीं मिली तो कैसे बनेगी सड़क
सबसे बड़ी अड़चन भू-अर्जन को लेकर है। सड़क निर्माण के लिए जिन हिस्सों में अतिरिक्त जमीन की जरूरत है, वहां भू-अर्जन की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण निर्माण एजेंसी काम आगे नहीं बढ़ा पा रही है। इसके अलावा प्रस्तावित पुल से जुड़ा मामला भी अभी लंबित है। ऐसे में टेंडर होने के बावजूद जमीन और पुल निर्माण से जुड़े मामलों का समाधान नहीं होने के कारण सड़क पर काम शुरू नहीं हो सका है।

चार साल से लोग कर रहे इंतजार
वार्ड की पूर्व पार्षद हुस्ना आरा ने बताया कि सड़क निर्माण की योजना बनने और टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ने के बावजूद धरातल पर काम नहीं होने से उनकी परेशानी बढ़ती जा रही है। हर दिन इस मार्ग से बड़ी संख्या में लोग आवागमन करते हैं।

सड़क की स्थिति खराब होने से वाहन चालकों को समय के साथ अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ रहा है। लोगों की मांग है कि भू-अर्जन और पुल निर्माण से जुड़े मामलों का जल्द समाधान कर निर्माण शुरू कराया जाए, ताकि 122 करोड़ की योजना कागज से निकलकर जमीन पर दिखाई दे सके।