पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी बड़ी जीत की ओर बढ़ती नजर आ रही है। 2011 से सत्ता पर काबिज ममता बनर्जी की पार्टी TMC के उम्मीदवार कई सीटों पर पीछे चल रहे हैं, जिससे राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं।
इस चुनाव में योगी आदित्यनाथ की आक्रामक चुनावी रणनीति और लगातार जनसभाओं ने खासा प्रभाव डाला। उन्होंने बंगाल के माथाभांगा, धुपगुड़ी और राजारहाट गोपालपुर समेत कई इलाकों में रैलियां कर सीधे तौर पर TMC सरकार को निशाने पर लिया।
सिंहासन खाली करो, बीजेपी आ रही है
चुनावी सभाओं में सीएम योगी ने खुले तौर पर TMC सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता अब बदलाव चाहती है और डर का माहौल खत्म करना जरूरी है। उन्होंने लोगों से भरोसा दिलाया कि भाजपा की सरकार आने पर सुरक्षा और कानून व्यवस्था बेहतर होगी।
“जय श्रीराम के नारे पर भी रोक”
योगी आदित्यनाथ ने अपने भाषणों में धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में हिंदू त्योहारों और धार्मिक अभिव्यक्तियों पर रोक जैसी स्थिति है। दुर्गा पूजा और विसर्जन जैसे आयोजनों को लेकर भी उन्होंने सरकार को घेरा।
“बंगाल की पहचान बदली नहीं जा सकती”
एक अन्य सभा में योगी ने कहा कि बंगाल की सांस्कृतिक पहचान को बदला नहीं जा सकता। उन्होंने इसे मां काली और मां दुर्गा की भूमि बताते हुए कहा कि यहां की परंपराएं और संस्कृति ही इसकी असली पहचान हैं।
इन सभी भाषणों और मुद्दों ने मिलकर पूरे चुनावी माहौल को एक अलग दिशा दी। योगी आदित्यनाथ की रैलियां केवल राजनीतिक सभाएं नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने उन्हें एक स्पष्ट संदेश देने का मंच बनाया—कानून व्यवस्था, सांस्कृतिक पहचान और सख्त शासन की जरूरत।
उनके आक्रामक और सीधे अंदाज ने कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरने के साथ-साथ मतदाताओं के एक बड़े वर्ग को भी प्रभावित किया। खासतौर पर उन क्षेत्रों में, जहां कानून व्यवस्था और पहचान के मुद्दे प्रमुख रहे, वहां उनकी सभाओं का असर साफ देखने को मिला।











