MP में 2000 से पहले नियुक्त शिक्षाकर्मियों को TET से राहत की उम्मीद, हाईकोर्ट ने सरकार से विचार करने को कहा

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By EditorPublished On: October 14, 2026

जबलपुर 
 मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने साल 2001 से पूर्व नियुक्ति शिक्षा कर्मियों को टीईटी से राहत प्रदान करने के संबंध में सुनवाई की. इस सुनवाई के बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर बैंच ने सरकार को 60 दिनों की समय सीमा में निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं. हाईकोर्ट जस्टिस विवेक सिंह की एकलपीठ ने पूर्व में सर्वोच्च न्यायालय व अन्य उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के अनुसार याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन का निराकरण करने का आदेश जारी करते हुए याचिका का निराकरण कर दिया. इस फैसले से पुराने सरकारी शिक्षकों को बड़ी राहत मिल सकती है। 

क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ता अनिल कुमार तोमर व अन्य की ओर से सरकारी शिक्षकों के संबंध में ये याचिका मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में दायर की गई थी. इस याचिका में कहा गया था कि उनकी नियुक्ति वर्ष 1997 से 1999 के बीच शिक्षाकर्मी वर्ग-दो और तीन के पदों पर हुई थी. सरकार के द्वारा पदोन्नति की प्रक्रिया में टीईटी उत्तीर्ण करने को अनिवार्यता कर दिया गया है. ऐसे में याचिका में सर्वोच्च न्यायालय व अन्य उच्च न्यायालयों के आदेश का हवाला देते हुए कहा गया था कि 3 सितम्बर 2001 से पूर्व नियुक्ति शिक्षा कर्मियों को पदोन्नति प्रक्रिया में टीईटी से छूट प्रदान की गई है. अन्य राज्यों में ऐस फैसला हुआ है, और ऐसी ही छूट मध्य प्रदेश के शिक्षकों को भी मिलनी चाहिए। 

60 दिन के अंदर मोहन सरकार को लेना होगा फैसला
याचिका में बताया गया कि देश के अन्य प्रदेशों की तरह मध्य प्रदेश में भी साल 2001 से पूर्व नियुक्ति शिाक्षाकर्मियों को टीईटी से छूट प्रदान की जाने की मांग करते हुए अभ्यावेदन दिया गया था. सक्षम प्राधिकरण के द्वारा अभ्यावेदन पर कोई निर्णय नहीं लिए जाने के कारण उक्त याचिका दायर की गई है. एकलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए पूर्व में पारित आदेश के अनुसार याचिकाकर्ताओं के अभ्यावेदन का निराकरण 60 दिनों की अवधि में करने के आदेश जारी किए हैं।