राजनीतिक मतभेद दरकिनार, पंचकूला सम्मेलन में एक साथ नजर आए पक्ष-विपक्ष के नेता

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By EditorPublished On: November 2, 2026

पंचकूला.

सेक्टर-5 स्थित इंद्रधनुष ऑडिटोरियम में हरियाणा विधानसभा की ओर से संविधान पखवाड़े के तहत जनप्रतिनिधि सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। वहीं, समापन सत्र में हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष मुख्य अतिथि होंगे।

हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण की अध्यक्षता में आयोजित इस सम्मेलन में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सहित प्रदेश के वर्तमान और पूर्व विधायक शामिल हुए। सम्मेलन की खास बात यह रही कि इसमें कांग्रेस के विधायक और पूर्व विधायक भी पहुंचे। अलग-अलग राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी ने इस आयोजन को राजनीतिक विचारधाराओं से ऊपर उठकर संवैधानिक मूल्यों पर संवाद का मंच बनाया।

“यह सरासर बदतमीजी है…” – अधिकारियों की मान-मनौव्वल भी रही नाकाम
कार्यक्रम स्थल पर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा नाराज होकर वापस लौट गए। हुड्डा कार्यक्रम स्थल के बाहर लगे होर्डिंग्स और पोस्टरों पर अपनी तस्वीर न पाकर बेहद खफा दिखे और इसे अपनी अनदेखी माना। भूपेंद्र हुड्डा के कार्यक्रम छोड़कर जाने की खबर मिलते ही प्रशासनिक और विधानसभा के वरिष्ठ अधिकारी उन्हें मनाने के लिए पीछे भागे। हालांकि, हुड्डा का गुस्सा शांत नहीं हुआ। उन्होंने अधिकारियों से स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह दिल्ली या रोहतक से विशेष रूप से इस कार्यक्रम में शिरकत करने आए थे और इस तरह का व्यवहार सरासर बदतमीजी है। हुड्डा के कड़े रुख को देखते हुए उनके समर्थक और वरिष्ठ विधायक बीबी बत्रा तथा आफताब अहमद भी विरोध जताते हुए कार्यक्रम स्थल से बाहर निकल गए।

233 जनप्रतिनिधियों का जुटान: चार पीढ़ियों के अनुभव का अनूठा संगम
विधानसभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण की पहल पर आयोजित इस सम्मेलन में प्रदेश भर से 57 वर्तमान और 176 पूर्व विधायकों सहित कुल 233 जनप्रतिनिधि हिस्सा लेने पहुंचे थे। कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राज्यपाल प्रो. असीम घोष और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की गरिमामयी मौजूदगी रही। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य संवैधानिक मूल्यों, हरियाणा की विकास यात्रा और ‘विकसित हरियाणा’ के रोडमैप में जनप्रतिनिधियों की ऐतिहासिक भूमिका पर मंथन करना था।

90 साल के बुजुर्ग दिग्गजों से लेकर युवा विधायकों तक की दिखी मौजूदगी
इस सम्मेलन की सबसे खास बात प्रदेश के संसदीय अनुभव की विविधता रही। एक तरफ जहां 1935 में जन्मे सबसे बुजुर्ग पूर्व विधायक गणपत राय और ओपी भारद्वाज तथा वरिष्ठतम महिला जनप्रतिनिधि सावित्री जिंदल मौजूद रहीं, वहीं दूसरी तरफ नई पीढ़ी के सबसे युवा विधायक आदित्य सुरजेवाला और युवा महिला विधायक विनेश फौगाट ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इसके अलावा 7-7 बार चुनाव जीतने वाले कैबिनेट मंत्री अनिल विज और पूर्व स्पीकर डॉ. रघुवीर सिंह कादियान आकर्षण का केंद्र बने रहे।