कॉलेज कर्मचारियों को झटका! MP हाईकोर्ट ने स्थायी दर्जे का आदेश किया रद्द

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By EditorPublished On: August 31, 2026

जबलपुर.

केवल लंबे समय तक काम करने से किसी कर्मचारी को स्थाई कर्मी बनने का अधिकार नहीं मिल जाता। जनभागीदारी समिति द्वारा नियुक्त व्यक्ति भी केवल नियुक्ति के आधार पर राज्य सरकार का नियमित कर्मचारी नहीं बन सकता।

हाई कोर्ट की युगलपीठ ने यह महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए सीधी के संजय गांधी स्मृति शासकीय महाविद्यालय के 11 कर्मचारियों को स्थाई कर्मी का दर्जा देने संबंधी एकलपीठ का आदेश निरस्त कर दिया।

दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत करना आवश्यक
प्रशासनिक न्यायाधीश आनंद पाठक व न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की युगलपीठ ने राज्य शासन की रिट अपील स्वीकार करते हुए कहा कि संबंधित कर्मचारियों को सरकारी नीति का लाभ लेने के लिए निर्धारित कट-आफ तिथि से निरंतर सेवा का विश्वसनीय दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत करना आवश्यक था।

15 वर्ष से अधिक समय से कार्यरत होने का दावा
कर्मचारियों ने दावा किया था कि वे 15 वर्ष से अधिक समय से महाविद्यालय में कार्यरत हैं और सामान्य प्रशासन विभाग की सात अक्टूबर, 2016 की नीति के तहत स्थाई कर्मचारी का दर्जा पाने के हकदार हैं। सिंगल बेंच ने उनके पक्ष में आदेश दिया था, जिसे उच्च शिक्षा विभाग ने चुनौती दी। युगलपीठ ने पाया कि कर्मचारी 16 मई, 2007 से निरंतर सेवा का ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सके। रिकार्ड में केवल अक्टूबर 2010 के बाद के लेबर चार्ज बिल उपलब्ध थे।

जनभागीदारी समिति को अधिकार नहीं
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जनभागीदारी समिति को राज्य सरकार की पूर्व अनुमति के बिना नियमित पद सृजित करने अथवा सरकारी नियुक्ति करने का अधिकार नहीं है। समिति द्वारा किसी व्यक्ति की सेवाएं लेने मात्र से उसे नियमित सरकारी कर्मचारी का दर्जा नहीं मिल जाता।