‘विरोध स्थल पर कब्जा नहीं कर सकते’, जंतर-मंतर पर CJI की दोटूक

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By EditorPublished On: November 3, 2026

नई दिल्ली
दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों पर पुलिस की कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. याचिकाओं में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई को चुनौती दी गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोई भी व्यक्ति या संगठन किसी विरोध स्थल पर स्थायी रूप से कब्जा नहीं कर सकता. चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि किसानों, पत्रकारों समेत हर किसी को विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है, लेकिन इसके लिए समय सीमा तय होनी चाहिए. एक समूह सिर्फ इसलिए किसी सार्वजनिक जगह पर दूसरों की आवाजाही नहीं रोक सकता, क्योंकि वहां उसका प्रदर्शन चल रहा है। 

दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान CJI ने यह टिप्पणी की. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि जंतर-मंतर एक सार्वजनिक सड़क है, प्रदर्शन स्थल नहीं. उन्होंने कहा कि प्रदर्शन की अनुमति सिर्फ एक दिन के लिए दी गई थी, लेकिन प्रदर्शनकारी 17 दिनों तक वहां जमे रहे. उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारियों ने संसद की तरफ मार्च किया था. बिना अनुमति किसी को संसद या सुप्रीम कोर्ट के पास जाने की इजाजत नहीं दी जा सकती। 

CJI सूर्यकांत ने कहा कि प्रदर्शन की अनुमति देने या खारिज करने वाले आदेश में इसकी वजह साफ बताई जानी चाहिए. वहीं, वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कोर्ट से अगले दो महीने तक धरना-प्रदर्शन पर रोक लगाने की अपील की. उन्होंने कहा, "हमारे लोग खून बहा रहे हैं." इस पर वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि करीब 7,000 लोगों को हिरासत में लिया गया था. उन्होंने सवाल किया, "क्या लोकतंत्र के तौर पर हमारा खून नहीं बह रहा है?" तुषार मेहता ने जवाब दिया कि लोगों को हिरासत में नहीं लिया गया, बल्कि प्रदर्शन स्थल से हटाया गया था। 

प्रदर्शन स्थलों पर CCTV निगरानी का मुद्दा भी उठा
सुनवाई के दौरान वकील प्रशांत भूषण ने प्रदर्शन स्थलों पर हो रही निगरानी और इसके कानूनी आधार की जानकारी मांगी. इस पर तुषार मेहता ने सवाल किया कि सार्वजनिक जगह पर किसी व्यक्ति को निजता का अधिकार कैसे हो सकता है. उन्होंने कहा कि सुरक्षा और अप्रिय घटनाओं को रोकने के लिए प्रदर्शन स्थलों पर CCTV कैमरे लगाए जाते हैं। 

जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि सार्वजनिक जगह पर किसी का चेहरा कैमरे में रिकॉर्ड हो जाना अपने आप में निजता का उल्लंघन नहीं है. उन्होंने सवाल किया कि सार्वजनिक जगह पर खड़े व्यक्ति को निजता की कितनी उम्मीद हो सकती है. तुषार मेहता ने कहा कि राज्य का वैध हित निजता के अधिकार का अपवाद है। 

प्रदर्शन से कारोबार प्रभावित होने की दलील
सुनवाई में दिल्ली के व्यापारिक संगठनों की तरफ से मुकुल रोहतगी ने कहा कि जंतर-मंतर और रामलीला मैदान जैसे स्थल करीब 80 साल से दिल्ली के प्रदर्शन स्थलों का हिस्सा रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि प्रभावित इलाकों में करीब 50 लाख लोग रहते हैं और प्रदर्शन के कारण कनॉट प्लेस की दुकानें बंद हैं. इससे त्योहारों के समय कारोबार प्रभावित हो रहा है. उन्होंने प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए अलग व्यवस्था बनाने की मांग की। 

CJI ने कहा कि प्रदर्शन आयोजित करने वाले सभी संगठनों को मामले में पक्षकार बनाया जाए, ताकि कोर्ट उनका पक्ष भी सुन सके. यह सुनवाई दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान सामूहिक हिरासत, पुलिस की कथित ज्यादती, मेट्रो स्टेशन बंद करने और इंटरनेट बंद करने जैसे आरोपों से जुड़ी याचिकाओं पर हो रही है।