SIR के बाद छूटे मतदाताओं को राहत की तैयारी, महाराष्ट्र ने चुनाव आयोग से की Form 6 बदलने की मांग

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By EditorPublished On: October 18, 2026

नई दिल्ली
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से जिन वैध मतादाताओं के नाम हट चुके हैं, उन्हें दोबारा अपना नाम जुड़वाने का मौका दिया जा रहा है। हालांकि, इसमें कानूनी और व्यावहारिक अड़चनें आ रही हैं। लोग कानूनी कार्रवाई के डर से अपना नाम दोबारा जुड़वाने के लिए सामने आने से हिचक रहे हैं। इसे ध्यान में रखते हुए महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय ने चुनाव आयोग (ECI) को एक प्रस्ताव भेजा है। इस प्रस्ताव में फॉर्म 6 (Form 6) में जरूरी संशोधन करने की सिफारिश की गई है।

चुनाव आयोग ने उन 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में छूटे हुए मतदाताओं को दोबारा जोड़ने के लिए 29 सितंबर को एक विशेष अभियान शुरू किया था। इसके लिए आयोग ने 'फॉर्म 6' का उपयोग करने के निर्देश दिए थे। हालांकि जमीनी स्तर पर चुनाव अधिकारियों (ERO) को मतदाताओं को यह फॉर्म भरवाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। आपको बता दें कि इन 20 राज्यों में एसआईआर का काम पूरा हो चुकी है।

जेल जाने का डर
फॉर्म 6 का शीर्षक नए मतदाताओं के लिए आवेदन पत्र है। इसमें आवेदक को यह घोषणा देनी होती है कि वह पहली बार मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर रहा है। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत झूठी घोषणा करने पर 1 साल तक की सजा, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। जो लोग पहले से रजिस्टर्ड मतदाता थे और SIR में जिनके नाम कट गए वे कानूनी कार्रवाई के डर से यह घोषणा करने से डर रहे हैं कि वे पहली बार आवेदन कर रहे हैं।

महाराष्ट्र ने भेजे प्रस्ताव
अपने प्रस्ताव में महाराष्ट्र में शीर्षक में बदलाव करने के लिए कहा है। फॉर्म के शीर्षक से नए मतदाता शब्द को हटाया जाए। उन आवेदकों के लिए एक अलग घोषणा का विकल्प दिया जाए, जो पहले किसी विधानसभा क्षेत्र में रजिस्टर्ड थे लेकिन अब कहीं भी नहीं हैं और दोबारा नाम जुड़वाना चाहते हैं। आवेदकों को अपने पुराने वोटर आईडी (EPIC) नंबर को दर्ज करने की अनुमति दी जाए।

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी
किसी भी वैधानिक फॉर्म में बदलाव करने के लिए केंद्र सरकार को मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 में संशोधन करना पड़ता है। चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू भी पहले यह स्पष्ट कर चुके हैं कि नियमों में संशोधन के बिना फॉर्म 6 में बदलाव करना अनाधिकृत या अवैध है।

यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट के समक्ष भी विचाराधीन है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ दिल्ली और अन्य राज्यों में फॉर्म 6 के इस्तेमाल से जुड़ी भ्रम की स्थिति पर सुनवाई कर रही है। अदालत ने संकेत दिए हैं कि वह इस संबंध में जल्द ही आवश्यक आदेश जारी कर सकती है।